सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक के लड़कियों के लिए सरकारी और गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों को लड़कियों के लिए अलग से शौचालय और सेनेटरी पैड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने हर जेंडर के लिए अलग शौचालय और पानी की सुविधा मुहैया कराने का आदेश दिया है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह फैसला दिया है.
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि सभी स्कूलों में छात्राओं को मुफ्त में सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है. कोर्ट के आदेश को तीन महीने के भीतर सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को लागू कर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि मासिक धर्म संबंधी आपात स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त यूनिफॉर्म और अन्य आवश्यक सामग्री से सुसज्जित मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन केंद्र स्थापित किया जाए.
दायर याचिका में स्कूलों में कम दाम में नैपकिन वाली वेंडिंग मशीनें लगाई जाएं साथ ही इस्तेमाल किए गए नैपकिन के डिस्पोजल का इंतजाम करने की मांग की गई थी. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सभी राज्यों से इस बारे में बात करके हलफनामा दाखिल करने को कहा था.
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखने से पहले इस बात की पुष्टि की थी कि क्या स्कूलों में वर्तमान में मुफ्त पैड उपलब्ध कराए जा रहे है या नही, और क्या स्कूली बालिकाओं को इसके लिए मांग करनी होगी. इसपर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया था कि इस पर हाल ही में एक राष्ट्रीय नीति बनाई गई है और इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा लागू किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि वितरण ज्यादातर स्कूलों और आंगनवाड़ियों के मध्यम से होगा. वित्तीय पहलू के लिए केंद्र राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आंशिक रूप से इसका वित्तपोषण करता है. कोर्ट ने कहा था कि चूंकि यह आपकी योजना है, इसलिए क्या आपके पास योजना के तहत सभी खंडों के अनुसार योजना के कार्यान्वयन की निगरानी करने के लिए कोई तंत्र है? इसपर एएसजी भाटी ने कहा था कि योजना राज्यों के परामर्श से बनाई गई. इसलिए केंद्र इसके कार्यान्वयन की निगरानी करेगा.
दरअसल जया ठाकुर ने स्कूली बालिकाओं की मेंस्ट्रुअल हेल्थ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी और मांग की थी कि छठवीं से लेकर 12वीं तक की बालिकाओं को स्कूल में मुफ्त सैनिटरी पैड उपलब्ध कराए जाएं. सभी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग से टॉयलेट बनाने के साथ-साथ पिछड़े इलाकों में मेंस्ट्रुअल हेल्थ को लेकर जन जागरूकता अभियान चलाए जाएं. कांग्रेस नेत्री याचिकाकर्ता जया ठाकुर ने अपनी याचिका में कहा है कि इन परेशानियों के कारण हर साल 23 लाख लड़कियां स्कूल छोड़ने पर मजबूर हैं और इसी वजह से हर साल 8 लाख महिलाओं की मौत होती है.
भारत एक्सप्रेस
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