सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के बाहरी क्षेत्र में स्थित गांव उल्देपुर को लेकर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने बड़े पैमाने पर किए गए अवैध निर्माण को लेकर चिंता व्यक्त की है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने मामले की जांच के लिए जस्टिस सुधांशु धुलिया की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग का गठन किया है.
आयोग जमीन की फरोख्त, कॉलोनियों के विकास और मेरठ विकास प्राधिकरण की भूमिका की जांच करेगी. कोर्ट ने राज्य सरकार को आयोग के खर्च के लिए 35 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया है. कोर्ट 9 दिसंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. वहीं कोर्ट जोन -ए में चिन्हित 16,726 अवैध निर्माण पर सीलिंग अन्य कार्रवाई का निर्देश पहले ही दे चुका है.
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अवैध कॉलोनी किए गए निर्माण को हर हाल में ढहाया जाएगा. सील के बावजूद बची इमारत पर भी कार्रवाई के आदेश जारी किया गया है. कोर्ट ने सेंट्रल मार्केट की सुनवाई के दौरान सेट बैक वाली प्रॉपर्टी के अवैध निर्माण के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार किया है. उन सभी ढांचे को गिराने का आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि तोड़ना तो पड़ेगा ही. 500 से 600 अवैध कॉलोनियों का निर्माण हो गया है.
प्राधिकरण से कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार की स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इससे पहले कोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के 80 भूखंड मालिकों को आदेश दिया था कि आवासीय प्लॉट पर चल रही कमर्शियल गतिविधियां तुरंत बंद की जाए.
कोर्ट ने आवास विकास विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन तय समय सीमा तक रिपोर्ट जमा नही हो सकी. कोर्ट ने बिना स्वीकृत लेआउट के आवासीय परिसरों को व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अनाधिकृत रूप से परिवर्तित करने से संबंधित एक अवमानना याचिका पर आदेश दिया था. कोर्ट ने पूर्व कमिश्नर ऋषिकेश भास्कर यशोद के आचरण पर भी आपत्ति जताई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि उन्होंने किस अधिकार के तहत मेरठ के सेंट्रल मार्किट क्षेत्र में कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को फिलहाल ध्वस्त न करने का आदेश जारी करके अनधिकृत निर्माण के खिलाफ पहले के न्यायिक निर्देशों की अवहेलना की है. सुप्रीम कोर्ट ने लिखित आदेश अपलोड होते ही पूरे मेरठ शहर में पुलिस और वहां के व्यापारियों में हड़कंप मच गया है.
वही दूसरी ओर आवास एवं विकास परिषद की ओर से सेंट्रल मार्किट के 860 भूखंड में से 44 ऐसे भवनों की सूची दी गई, जो पूर्णतः व्यावसायिक हैं. इनमें छह स्कूल, छह अस्पताल और चार बैंक्वेट हॉल सहित शोरूम, दुकानें चल रही हैं. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि ऐसे स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की जान जोखिम में है. कोई हादसा होता है तो बच्चों की जान भी जा सकती है.
दरअसल 27 अक्टूबर 2025 को मेरठ आयुक्त ने आदेश पारित किया था कि सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में दूकानों को और ध्वस्त ना किया जाए, क्योंकि मास्टर प्लान में प्रस्तावित संशोधन के माध्यम से इन दुकानों को बाजार गली का दर्जा दिया जाएगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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