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सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना तुरंत लागू करें

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना अक्षरशः लागू करने का केंद्र सरकार को आदेश दिया है. कोर्ट ने इसे पूरी भावना से लागू करने को कहा है. योजना लागू होने से घायल प्रत्येक व्यक्ति को अधिकतम डेढ़ लाख तक मुफ्त इलाज का अधिकार मिलेगा. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मोटर वाहन कानून की धारा 162 के तहत कैशलेस उपचार की योजना बनाई हैं.

सरकार ने कहा है कि दुर्घटना के तुरंत बाद एक घंटे की अवधि के दौरान सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार की योजना बनाई गई है. जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने आदेश दिया कि वह अगस्त 2025 के अंत तक एक हलफनामा दाखिल कर योजना के लाभार्थियों की संख्या और उसके कार्यान्वयन की स्थिति का ब्यौरा दे. यह योजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा अधिसूचित की गई है और 5 मई से प्रभावी है.

कैशलेस योजना के सुचारू कार्यान्वयन आवश्यक हैं

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही की चेतावनी देते हुए गोल्डन ऑवर स्कीम को एक सप्ताह के भीतर लागू करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ” लोग सड़क दुर्घटनाओं में मर रहे हैं. आप विशाल हाइवे बना रहे हैं, लेकिन लोग वहां मर रहे हैं क्योंकि वहां कोई सुविधा नहीं है. कोई गोल्डन ऑवर ट्रीटमैंट योजना नहीं है.

इतने हाइवे बनाने का क्या फायदा?” वही केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा था कि MORTH अन्य चुनौतियों को भी हल करने का प्रयास कर रहा हैं, जो बाद में सामने आई और जो कैशलेस योजना के सुचारू कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हैं. जिसपर जस्टिस ओका ने कहा कि आपको कहीं से शुरुआत करनी होगी. आप बाद में योजना में सुधार कर सकते है.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि गोल्डन ऑवर के दौरान कैशलेस इलाज की योजना बनाना न केवल संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की रक्षा करता है, बल्कि यह मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 162 के तहत केंद्र सरकार का वैधानिक दायित्व भी है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया था कि योजना को.मोटर वाहन अधिनियम की 162 की उपधारा (2) के अनुसार यथाशीघ्र तथा किसी भी स्थिति में 14 मार्च 2025 तक लागू किया जाना चाहिए. यह भी साफ कर दिया था कि कोर्ट इसके लिए और समय नही देगा.

ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट ने मुंद्रा बंदरगाह ड्रग्स मामले में हरप्रीत सिंह तलवार की जमानत याचिका खारिज की

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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