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‘इसे इतनी भावुकता से मत लें’, कॉकरोच जनता पार्टी मामले में जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि इसे इतना भावुकता से न लें. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी कोई गंभीर आवश्यकता नहीं है, हम देखेंगे. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील एनके गोस्वामी ने सीजेआई से जल्द सुनवाई की मांग की, कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी न्यायपालिका की छवि धूमिल कर रही है. इस पर कोर्ट ने कहा इसे इतनी भावुकता से मत लें. यह याचिका वकील राजा चौधरी की ओर से दायर की गई है.

सीबीआई जांच और एफआईआर की मांग

वहीं कोर्ट में मौजूद एक अन्य वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता फर्जी वकील डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं, और साथ ही यह भी कहा कि अदालत में होने वाली बातचीत का इस्तेमाल पैसा कमाने के लिए नहीं किया जा सकता. दायर याचिका में पार्टी पर कथित फर्जी लॉ डिग्रियों व सुप्रीम कोर्ट की संस्थागत पहचान के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है. साथ ही इन लोगों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की भी मांग की गई है. दायर याचिका में कहा गया है कि यह मामला संस्थागत अखंडता और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़े व्यापक मुद्दों को उठाता है. वहीं कॉकरोच जनता पार्टी के ट्रेड मार्क को लेकर भी दो याचिकाएं दायर की गई हैं.

‘कॉकरोच’ शब्द पर विवाद

सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान कॉकरोच शब्द का नाम सामने आया था. जिसको लेकर यह व्यंग्यात्मक आंदोलन चल रहा है. सीजेआई ने मीडिया, सोशल मीडिया और आरटीआई के जरिए सक्रियता की ओर मुड़ रहे बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी. इसके बाद सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी हैशटैग तेजी से वायरल हो गया. बाद में सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां उन लोगों पर लक्षित थीं, जो फर्जी डिग्रियों के साथ पेशे में शामिल हो रहे हैं.

ये भी पढ़ें: नीट यूजी मामला: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, 29 मई को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सीजेपी से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ सीबीआई से स्वतंत्र जांच कराने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि संबंधित लोगों ने खुद को वकील या कानूनी विशेषज्ञ बताकर जनता को गुमराह किया और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई. दायर याचिका में सीबीआई को निर्देश देने की अपील की गई है कि जाली डिग्रियों के कथित उपयोग और आपराधिक साजिश की गहन जांच की जाए. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के तहत यह कार्रवाई की. खुफिया एजेंसियों ने सीजेपी पर भड़काऊ सामग्री फैलाने और देश की संप्रभुता को चुनौती देने का आरोप लगाया था.

गोपाल कृष्ण

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