आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन प्रक्रिया के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 170(3) के तहत 2026 के बाद की जनगणना की जा सकती है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि पुनर्गठन अधिनियम की धारा 26 कोई अलग से टापू नही है, इसे संविधान की समग्र योजना के साथ पढ़ा जाना चाहिए.
संविधान के तहत परिसीमन पर रोक
कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के उदाहरण को खारिज करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर का परिसीमन 2019 के पुनर्गठन अधिनियम के तहत एक विशेष परिस्थिति में हुआ. यह अनुच्छेद 170 के अधीन शासित अन्य राज्यों पर लागू नही होता है. कोर्ट ने पुरुषोत्तम रेड्डी की ओर से दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा था कि केवल केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में परिसीमन अभ्यास करना और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना को छोड़ना असंवैधानिक है. कोर्ट ने कहा कि आंध्र प्रदेश परिसीमन अधिनियम 2014 की धारा 26 में सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रावधान संविधान में मौजूद रोक को पार नहीं कर सकता है.
जनगणना के बाद परिसीमन
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि वह जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के साथ समानता चाहते हैं, और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में परिसीमन किया जाना चाहिए. वही केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराजन ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम की धारा 26 का हवाला दिया था और कहा था कि परिसीमन प्रक्रिया 2026 की जनगणना समाप्त होने के बाद ही शुरू की जा सकती है. इस प्रावधान में आंध्र प्रदेश विधानसभा सीटों की संख्या 175 से बढ़ाकर 225 और तेलंगाना विधानसभा में सीटों की संख्या 119 से बढ़ाकर 153 करने का प्रावधान है.