ग्रैंड वेनिस मॉल के मालिक सतेंद्र भसीन उर्फ मोंटू भसीन को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने भसीन को सरेंडर करने का एक सप्ताह का समय दिया है. जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने 6 नवंबर 2019 को मिली जमानत की शर्तों के उल्लंघन के बाद जमानत को रद्द करने का आदेश दिया है. भसीन द्वारा जमानत की शर्तों के तहत जमा की गई 50 करोड़ की राशि को जब्त कर लिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब्त राशि में से 5 करोड़ रुपए राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण को जाएंगे और शेष 45 करोड़ रुपए उस समाधान पेशेवर को भुगतान किए जाएंगे जो भसीन की कंपनी के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही चल रही है. कोर्ट ने अपने शर्तो में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि भसीन 12 महीने यानी एक साल बाद नियमित जमानत के लिए नए सिरे से अर्जी दाखिल कर सकते है. बशर्ते वह संबंधित दिवालियापन कार्यवाही में पारित किसी भी आदेश का अनुपालन करे.
भसीन पर ग्रेटर नोएडा में ग्रैंड वेनिस परियोजना में निवेशकों को कथित तौर पर धोखा देने का आरोप है. इसके खिलाफ पहले भी कई मुकदमा दर्ज हो चुका है.
ग्रैंड वेनिस मॉल में पार्टनरशिप को लेकर भसीन का डीएस ग्रुप के साथ भी लंबे समय से विवाद चल रहा है. पिछले साल 10 अप्रैल 2025 को ईडी ने छापेमारी थी. दिल्ली, नोएडा, गोवा में करीब छह ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. ये छापेमारी निवेशकों से पैसा हड़पने के मामले में पीएमएलए के तहत कार्रवाई की गई थी. डीएस ग्रुप का आरोप है कि इसने घर खरीदने वालों से करीब 40 करोड़ रुपए की ठगी की है.
ईडी की यह कार्रवाई भसीन इंफोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, उसके डायरेक्टर और मालिक सतेंद्र सिंह भसीन सहित उसके अन्य सहयोगियों के यहां की गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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