दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस बर्बरता और बल प्रयोग की जांच के लिए गठित हाई पावर जांच कमेटी के पुनर्गठन की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को आश्वस्त किया कि मुख्य (मूल) याचिका के साथ इस नई अर्जी पर भी विधिवत सुनवाई की जाएगी.
मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने कमेटी पुनर्गठन की इस याचिका का कड़ा विरोध किया और इसे ‘रहस्यमय’ करार दिया. साथ ही, उन्होंने कमेटी के नए सदस्यों के लिए याचिकाकर्ता की ओर से सुझाए गए नामों पर भी गंभीर आपत्ति जताई. सॉलिसिटर जनरल ने तीखा तर्क देते हुए कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है, यहाँ कुछ और ही करने का प्रयास हो रहा है.
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अर्जी पर त्वरित सुनवाई की मांग की. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि हमें खुली अदालत में जजों के नाम लेना पसंद नहीं है. इस पर गोपाल शंकरनारायणन ने स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान वे जजों के नाम नहीं लेंगे.
वहीं, सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि यह अर्जी एक आम चिंता और कुछ याचिकाकर्ताओं के मन में उपजे संदेह को दर्शाती है. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट करते हुए कहा-
“जो भी कमेटी काम करेगी, वह पूरी तरह अदालत की देखरेख में काम करेगी. हमने इस मुख्य मामले का अभी अंतिम निपटारा नहीं किया है. आप सभी कमेटी के सहयोग के लिए हैं; इसलिए उन्हें अपना काम करने दें और प्रगति देखें.”
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5-सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है.
गठित उच्चस्तरीय समिति विरोध प्रदर्शन से जुड़े कई संवेदनशील और गंभीर पहलुओं की गहन जांच करेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सभी जांच एजेंसियों को कड़ा निर्देश दिया है कि वे छात्र प्रदर्शनों से जुड़े सभी डिजिटल व दस्तावेजी साक्ष्य सुरक्षित रखें. इनमें सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और ड्रोन फुटेज, बॉडीवॉर्न कैमरा (Body-worn Camera) रिकॉर्डिंग और अन्य वीडियो, वायरलेस कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और पीसीआर (PCR) कॉल लॉग शामिल हैं.
अदालत ने सभी संबंधित एजेंसियों को जांच समिति के साथ पूर्ण सहयोग करने और समिति को प्राथमिकता वाले मुद्दों पर जल्द अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई आगामी 10 सितंबर को होगी.
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने एक बेहद अहम संकेत देते हुए कहा कि जिन आपराधिक प्राथमिकियों (FIR) में केवल छात्र ही आरोपी बनाए गए हैं, उन्हें सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए सीधे रद्द करने पर विचार कर सकता है.
Jammu Rohingya basti: जम्मू के करयानी तालाब इलाके में कथित अवैध बस्ती को लेकर प्रशासन…
TRAI के सर्किलवार आंकड़ों के मुताबिक बिहार में रोजाना करीब 49.1 पेटाबाइट डेटा की खपत…
Singapore Economy History: 1965 में मलेशिया से अलग होकर स्वतंत्र हुए सिंगापुर को ली क्वान…
Aao School Chalen Abhiyan Delhi School Admission: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 'आओ स्कूल चलें' अभियान के…
Pattinapakkam Fishermen Protest: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय द्वारा पट्टिनापक्कम में ₹1,200 करोड़ के सचिवालय निर्माण…
एशिया कप ट्रॉफी विवाद के बाद सवाल उठ रहा है कि Asian Games 2026 में…