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युवराज सिंह के ‘पर्सनालिटी राइट्स’ की रक्षा; हाई कोर्ट ने कहा- बिना परमिशन नाम-फोटो का इस्तेमाल पड़ेगा भारी

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के बिना अनुमति के उनके नाम, उनकी तस्वीर, आवाज और अन्य पहचान के इस्तेमाल करने पर रोक लगा दिया है. साथ ही कोर्ट ने एआई तकनीक के जरिये तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और तस्वीरों को हटाने का भी निर्देश दिया है.

क्या है मामला?

जस्टिस ज्योति सिंह के कोर्ट ने यह आदेश दिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने क्रिकेट युवराज सिंह के वकील को भरोसा दिया था कि वह इस मामले में अंतरिम आदेश पारित करेंगी. कोर्ट ने आदेश देते हुए माना कि अगर युवराज सिंह को तत्काल संरक्षण नहीं दिया गया तो उनकी प्रतिष्ठा और व्यक्तित्व अधिकारों को अपूरणीय क्षति हो सकती है. कोर्ट ने सभी संबंधित पार्टियों को निर्देश दिया है कि वे युवराज सिंह के नाम, तस्वीर, आवाज, चेहरे, व्यक्तित्व या उनसे जुड़ी किसी भी पहचान का उनकी उनकी अनुमति के बिना व्यक्तिगत या व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं करेंगे.

36 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि यह रोक एआई, डीपफेक, एआई चैटबॉक्स, फेस मॉर्फिस और फेस स्वैपिंग जैसी तकनीकों से तैयार की गई सामग्री पर भी लागू होगा. पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने कहा था कि सबसे पहले मूल अपलोडर को 48 घंटे के भीतर कंटेंट हटाने का अवसर दिया जाएगा. इसके बाद याचिकाकर्ता संबंधित प्लेटफॉर्म को सूचित करेगा और फिर मध्यस्थ 36 घंटे के भीतर आवश्यक कार्रवाई करेंगे. कोर्ट ने अंतरिम रोक की अर्जी पर सभी मध्यस्थ प्लेटफॉर्म को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था.

30 नवंबर को अगली सुनवाई

कोर्ट 30 नवंबर को मामले में अगली सुनवाई करेगा. कोर्ट उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कई लोग और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी अनुमति के बिना उनके नाम, तस्वीर और अन्य पहचान से जुड़े तत्वों का इस्तेमाल कर सामान बेच रहे हैं और विभिन्न तरह का कंटेंट प्रकाशित कर रहे हैं. सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से कहा गया था याचिका में मांगी गई राहते काफी व्यापक हैं. इसपर कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मध्यस्थ है और उनसे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वे खुद तय करे कि कौन सा कंटेंट उल्लंधनकारी है और कौन सा नहीं.

कोर्ट ने यह भी कहा था कि फिलहाल केवल उन्हीं यूआरएल को हटाने का निर्देश दिया जाएगा, जिनका उल्लेख याचिका में किया गया है. यदि भविष्य में नया कथित उल्लंधनकारी कंटेंट सामने आता है, तो युवराज सिंह रिकॉर्ड पर सामग्री रखकर अदालत से अतिरिक्त राहत मांग सकते हैं.

यह भी पढ़ें-दिल्ली HC का बड़ा एक्शन: पेड़ काटने की अवैध मंजूरी देने पर पूर्व PCCF समेत 2 अधिकारी अवमानना के दोषी

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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