लाइफस्टाइल

सावधान! टेढ़ा खीरा और मीठी मूली है बड़ा ‘धोखा’, CSA की रिसर्च में खुली पोल

Health Warning: खाने की थाली के साथ परोसा जाने वाला सलाद हम अक्सर बिना किसी जांच-परख के काट लेते हैं. खीरा थोड़ा टेढ़ा है तो क्या हुआ? मूली थोड़ी मीठी है तो और भी अच्छी बात है! आमतौर पर हमारी सोच यही होती है और हम बेझिझक इन सब्जियों का सेवन कर लेते हैं. लेकिन, कानपुर स्थित चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (CSA) के पादप रोग एवं कीट विज्ञान विभाग के ताजा अध्ययन ने इस आम धारणा को पूरी तरह पलट कर रख दिया है.

खीरे में टेढ़ापन खतरनाक (Cucumber Health Warning)

हम अक्सर टेढ़े खीरे को काटकर सलाद में शामिल कर लेते हैं, लेकिन CSA के विशेषज्ञ प्रो. मुकेश श्रीवास्तव बताते हैं कि खीरे में टेढ़ापन मुख्यतः फल मक्खी (Fruit Fly) की करतूत का नतीजा होता है. यह कीट खीरे का रस चूसता है और उस स्थान पर भयानक संक्रमण फैला देता है. इस हमले से खीरे की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, फल सिकुड़ने लगता है और अंततः वह विकृत (टेढ़ा) आकार ले लेता है.

खतरा सिर्फ आकार बिगड़ने तक सीमित नहीं है. संक्रमण के कारण खीरे की स्वाभाविक कड़वाहट (एल्कोलाइड तत्वों के कारण), जो पाचन क्रिया को दुरुस्त रखती है, पूरी तरह नष्ट हो जाती है. जब ये तत्व ही खत्म हो जाते हैं, तो ऐसा खीरा खाना न केवल बेकार है, बल्कि आपकी सेहत के लिए हानिकारक भी हो सकता है.

मीठी मूली यानी ‘औषधीय गुणों’ से खाली (Radish Health Warning)

मूली के मामले में विज्ञान थोड़ा अलग, लेकिन उतना ही चौंकाने वाला है. अक्सर लोग मीठी मूली खाना पसंद करते हैं, लेकिन असल में मूली का तीखापन ही उसकी सबसे बड़ी पहचान और गुण है. यह तीखापन ‘एफिड्स’ नामक कीट की गतिविधि से पैदा होता है. जब ये कीट मूली की पत्तियां खाते हैं, तो अपनी लार छोड़ते हैं, जिससे मूली में मौजूद ‘आइसोथायोसाइनेट एल्कोलाइड’ सक्रिय हो जाता है. यही तत्व हमारी भूख बढ़ाता है और मूली को उसका असल औषधीय महत्व प्रदान करता है.

अगर मूली मीठी है, तो इसका सीधा सा अर्थ है कि एफिड्स ने उसे नहीं खाया, वह एल्कोलाइड सक्रिय नहीं हुआ और उस मूली में कोई मुख्य औषधीय गुण बचा ही नहीं है.

कीटनाशक का जहर और सुंदरता का भ्रम (CSA University Health Warning)

बाजार का कड़वा सच यह है कि पत्तियों पर कीट के छेद या निशान दिखने से मूली की बिक्री घट जाती है. ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किसान भारी मात्रा में कीटनाशकों का उपयोग करते हैं. इससे कीट तो मर जाते हैं, पत्तियां बेदाग दिखती हैं और मूली मीठी हो जाती है. लेकिन इसके साथ ही उसका सारा पोषण भी खत्म हो जाता है. बाजार में चमकती, बेदाग और मीठी दिखने वाली मूली असल में कीटनाशकों से नहाई हुई और पोषण की दृष्टि से एकदम खोखली होती है.

सब्जी चुनते वक्त हमेशा रखें इन बातों का ध्यान

खीरा सीधा चुनें: हमेशा बिल्कुल सीधे आकार का खीरा खरीदें. अगर गलती से टेढ़ा खीरा आ भी जाए, तो उसके मुड़े हुए/संक्रमित हिस्से को काफी दूर से काटकर फेंक दें.

मूली के पत्तों पर छेद हैं अच्छे: मूली खरीदते समय उसकी पत्तियों पर कीट के छेद देखना एक अच्छा संकेत है. इसका मतलब है कि वहां कीटनाशक का उपयोग कम हुआ है और मूली का फायदेमंद तीखापन बरकरार है.

मुट्ठी के आकार की सब्जियां: आलू, टमाटर और परवल जैसी सब्जियां हमेशा उसी आकार की लें जो आसानी से आपकी मुट्ठी में समा जाएं. बहुत बड़े आकार की सब्जियां अक्सर रसायनों का नतीजा होती हैं.

दाग अच्छे हैं: जिस सब्जी पर कीड़ों के हल्के निशान हों, वह इस बात का सबूत है कि वह कीटनाशक-मुक्त (Pesticide-free) है.

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CSA का यह अध्ययन हमें एक बहुत बड़ा सबक देता है: जो सब्जी देखने में बेदाग, सुंदर और स्वाद में मीठी लगे, जरूरी नहीं कि वह आपकी सेहत के लिए भी श्रेष्ठ हो. प्रकृति के नियमों में कभी-कभी सब्जियों का हल्का तीखापन, उनकी कड़वाहट और उन पर लगे कीड़ों के निशान ही उनकी असली शुद्धता की पहचान होते हैं. इसलिए अपनी नजरिया बदलिए, सुंदरता के पीछे मत भागिए; अगली बार जब सलाद की प्लेट सजाएं, तो ‘टेढ़े खीरे’ और ‘मीठी मूली’ से दूरी जरूर बनाएं. आपकी यह छोटी सी सावधानी, आपको बड़ी बीमारियों से बचा सकती है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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