कला-साहित्य

सुर, ताल और हुनर का भव्य संगम: पुष्कला संगीत केंद्र के 11वें वार्षिक समारोह में बाल कलाकारों ने अपने संगीत से बांधा समां

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित पुष्कला संगीत केंद्र ने भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य के क्षेत्र में अपने 11 सफल वर्ष पूरे होने के अवसर पर वार्षिक संगीत परीक्षाओं का आयोजन किया. ये परीक्षाएं प्रयागराज की प्रयाग संगीत समिति से मान्यता प्राप्त थीं. इसमें विद्यार्थियों ने अपनी कला का शानदार प्रदर्शन किया.

कार्यक्रम में आगरा से आए वरिष्ठ संगीतज्ञ गुरु रमन सिंह ढाकर मुख्य परीक्षक के रूप में शामिल हुए. कथक, गायन और तबला वादन में उनके लंबे अनुभव का लाभ विद्यार्थियों को मिला. उन्होंने छात्रों का मार्गदर्शन भी किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

छात्रों की प्रस्तुतियों ने जीता दिल

कार्यक्रम में कई विद्यार्थियों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं. साद्यांत कौशल ने तबला वादन और गायन से सभी की खूब तारीफ बटोरी. आकाश बोस ने ओडिसी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी. वहीं कथक की छात्राएं रुही, अविका और वाणी ने अपने नृत्य से दर्शकों को प्रभावित किया. जी. ऐश्वर्या ने राधा-कृष्ण लीला का भावपूर्ण मंचन किया, जबकि रोहित और नमन ने अपने मधुर गायन से सभी का मन मोह लिया. इसके अलावा कई अन्य बच्चों ने भी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया.

लावण्या-कविशा की आयोजन में अहम भूमिका

इस कार्यक्रम को सफल बनाने में लावण्या सिन्हा और कविशा सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने पूरे आयोजन की व्यवस्था और संचालन को बेहतर ढंग से संभाला.

संगीत जीवन को बेहतर बनाता है: गुरु स्नेहा मुखर्जी

केंद्र की संस्थापक और निर्देशिका गुरु स्नेहा मुखर्जी ने सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और कलाकारों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है. संगीत तनाव कम करता है, मन को शांति देता है और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है. उन्होंने सभी से भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य से जुड़ने की अपील की.


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पुष्कला संगीत केंद्र 11 वर्षों से दे रहा शिक्षा

पुष्कला संगीत केंद्र पिछले 11 वर्षों से भारत और विदेशों के विद्यार्थियों को ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत और नृत्य की शिक्षा दे रहा है. केंद्र देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का लगातार प्रयास कर रहा है.

कई प्रतिष्ठित गुरु रहे मौजूद

इस वार्षिक परीक्षा में दिल्ली और देश के विभिन्न हिस्सों से कई प्रसिद्ध संगीत गुरु और उनके शिष्य शामिल हुए. इनमें डॉ. रचना, पं. नंदलाल गंधर्व, आनंद देवनाथ, महेश प्रजापति, रोहित पवार, गजेंद्र परिहार और राजकुमार पवार सहित कई संगतकारों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई.

  • भारत एक्सप्रेस
Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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