प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विदेश दौरा
PM Modi 5 Countries Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई की सुबह नई दिल्ली से एक बेहद महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर निकले थे. इस यात्रा के दौरान उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे और इटली का दौरा किया. करीब 140 घंटे के इस मैराथन दौरे में पीएम मोदी ने 6 दिनों के भीतर 5 देशों के साथ कई बड़े और ऐतिहासिक समझौते किए. 21 मई की सुबह वे वापस दिल्ली लौट आए.
इस दौरे को भारत की कूटनीति और आर्थिक तरक्की के लिहाज से गेम चेंजर माना जा रहा है. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पीएम मोदी इन 5 देशों से भारत के लिए क्या-क्या लेकर लौट रहे हैं और इसके हमारे लिए क्या मायने हैं.
पीएम मोदी के दौरे का पहला पड़ाव यूएई था. यहां वे करीब 3 घंटे रुके और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच 7 समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए. इसमें सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण समझौता था- ‘स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व एग्रीमेंट’ (Strategic Petroleum Reserve Agreement).
इस समझौते के तहत यूएई की सरकारी तेल कंपनी ‘अबुधाबी नेशनल ऑइल कंपनी’ (ADNOC) भारत के सुरक्षित तेल भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी. सबसे बड़ी बात यह है कि अगर भविष्य में कभी युद्ध जैसे हालात बनते हैं या दुनिया में तेल की सप्लाई रुक जाती है, तो इस रिजर्व तेल पर पहला हक भारत का होगा. इसके अलावा, यूएई इस तेल को रखने के लिए भारत को किराया भी देगा.
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है. किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए भारत के पास सिर्फ 9 दिनों का तेल रिजर्व रखने की क्षमता है, और फिलहाल वह भी सिर्फ 65% ही भरा हुआ है. तुलना के लिए देखें तो जापान के पास 254 दिन, अमेरिका के पास 200 दिन और चीन के पास 120 से 180 दिनों का तेल रिजर्व रहता है.
यूएई के साथ हुई इस डील के बाद भारत में 1.37 करोड़ बैरल तेल स्टोर होगा और बाकी का 1.63 करोड़ बैरल तेल यूएई के ही ‘फुजैराह’ स्टोरेज में सुरक्षित रखा जाएगा. इससे संकट के समय भारत का तेल बैकअप बढ़कर 14 से 15 दिनों का हो जाएगा.
रास्ते की टेंशन भी खत्म
यूएई से तेल आने का एक बड़ा फायदा यह है कि इसके जहाजों को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (समुद्री रास्ता जहां अक्सर तनाव रहता है) से नहीं गुजरना पड़ेगा. यह तेल सीधे एक खास पाइपलाइन के जरिए ओमान सागर के किनारे बने फुजैराह बंदरगाह पहुंचेगा और वहां से सीधे समुद्री जहाज से भारत आ जाएगा.
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यूएई से दो और बड़े फायदे
शिप रिपेयरिंग सेंटर: यूएई अब गुजरात के वडीनार में जहाजों की मरम्मत (Repairing) का एक बड़ा सेंटर बनाएगा, जहां भारतीय नाविकों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी.
48 हजार करोड़ का निवेश: यूएई भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में 3 बिलियन डॉलर (करीब 48 हजार करोड़ रुपए) का भारी-भरकम निवेश करने जा रहा है.
नीदरलैंड्स से डील: चीन की बादशाहत को चुनौती और ‘चिप’ क्रांति
दौरे के दूसरे पड़ाव में पीएम मोदी नीदरलैंड्स पहुंचे, जहां उन्होंने वहां के राजपरिवार और प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से मुलाकात की. यहां भारत ने 17 समझौतों पर दस्तखत किए, जिनमें से दो समझौते भारत का भविष्य बदल सकते हैं.
स्मार्टफोन, गाड़ियां, कंप्यूटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को चलाने के लिए सेमीकंडक्टर चिप की जरूरत होती है. दुनिया में इस चिप को बनाने वाली मशीनों की तकनीक पर नीदरलैंड्स की ‘ASML’ कंपनी का एकाधिकार (Monopoly) है.
अब इस डच कंपनी ASML ने भारत की ‘टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स’ के साथ हाथ मिलाया है. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में 91 हजार करोड़ रुपए की
लागत से भारत का पहला सेमीकंडक्टर प्लांट बना रही है. नीदरलैंड्स की मदद से अब भारत में ही इन एडवांस चिप्स का उत्पादन शुरू हो सकेगा.
इसका फायदा क्या होगा? भारत अभी अपनी 90% चिप्स चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से आयात करता है. साल 2023-24 में भारत ने 1.05 लाख करोड़ रुपए की चिप खरीदी थी. इस डील के बाद चीन पर भारत की निर्भरता पूरी तरह खत्म होने की राह पर बढ़ जाएगी.
स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां (EV), 5जी नेटवर्क और अंतरिक्ष यान बनाने के लिए कोबाल्ट, कॉपर, लिथियम, ग्रेफाइट और निकल जैसे 30 ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ की जरूरत होती है. भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का 100% क्रिटिकल मिनरल दूसरे देशों, खासकर चीन से मंगवाता है.
नीदरलैंड्स के पास इन मिनरल्स की खोज और प्रोसेसिंग की बेहद आधुनिक टेक्नोलॉजी है. इस समझौते के तहत नीदरलैंड्स यह तकनीक भारत को देगा, जिससे भारत अपने देश में ही इन खनिजों को निकाल और साफ कर सकेगा. इससे चीन का दबदबा कम होगा.
नीदरलैंड्स से दो और खास बातें
कल्पसार प्रोजेक्ट में मदद: गुजरात में खंभात की खाड़ी पर बन रहे 30 किलोमीटर लंबे ‘कल्पसार डैम प्रोजेक्ट’ के डिजाइन और इंजीनियरिंग में नीदरलैंड्स के एक्सपर्ट भारत की मदद करेंगे.
चोल साम्राज्य के अवशेषों की वापसी: नीदरलैंड्स ने चोल राजवंश के समय की तांबे की 24 प्लेटें (ताम्रपत्र) भारत को वापस लौटाई हैं. 18वीं सदी में डच मिशनरी इन्हें यूरोप ले गए थे. इन पर तमिल भाषा में चोल साम्राज्य की समुद्री ताकत और शासन व्यवस्था का इतिहास लिखा है.
स्वीडन से डील: यूरोप के साथ ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ का रास्ता साफ
पीएम मोदी 17 मई को अपने तीसरे पड़ाव यानी स्वीडन पहुंचे. यहां उन्हें स्वीडन के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ से नवाजा गया. पीएम मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ 6 रणनीतिक समझौते किए, जिससे अगले 5 सालों में दोनों देशों का व्यापार दोगुना हो जाएगा.
साल के अंत तक होगा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA)
स्वीडन यात्रा के दौरान एक बहुत बड़ी कामयाबी यह मिली कि यूरोपियन यूनियन (EU) की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पीएम मोदी से वादा किया कि इस साल के अंत तक भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (मुक्त व्यापार समझौता) पर साइन हो जाएंगे.
इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है. इसके लागू होते ही यूरोप से भारत आने वाली 96.6% चीजों पर टैक्स (टैरिफ) या तो खत्म हो जाएगा या बहुत कम हो जाएगा. इसी तरह, भारत से यूरोप जाने वाले 99.5% सामान पर भी कोई टैक्स नहीं लगेगा. इससे भारतीय व्यापारियों को यूरोप का एक बहुत बड़ा बाजार मिल जाएगा.
नॉर्वे से डील: ग्रीन एनर्जी और एलपीजी का नया पार्टनर
18 मई को पीएम मोदी नॉर्वे पहुंचे. यह यात्रा इसलिए खास है क्योंकि 43 साल बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नॉर्वे गया था. इससे पहले 1983 में इंदिरा गांधी वहां गई थीं. दोनों देशों के बीच 12 मुद्दों पर समझौते हुए, जिसमें सबसे खास रही ‘ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप’.
क्लीन एनर्जी में मिलेगी मदद
नॉर्वे अपनी 98% बिजली की जरूरत सौर, पवन और जलविद्युत जैसी क्लीन एनर्जी (साफ ऊर्जा) से पूरी करता है. भारत का लक्ष्य साल 2030 तक 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी पैदा करने का है, लेकिन अभी हम सिर्फ 283.46 गीगावाट तक ही पहुंच पाए हैं. नॉर्वे भारत के इन क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश और तकनीक देगा, जिससे भारत अपने टारगेट को समय पर पूरा कर सके.
नॉर्वे यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है जो हर दिन
20 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है. ईरान और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने नॉर्वे से एलपीजी (LPG) की खरीद बढ़ा दी है. भविष्य में भारत नॉर्वे से अपने रणनीतिक भंडारों के लिए कच्चा तेल भी खरीद सकता है.
(नोट: इस यात्रा के दौरान ऑस्लो में एक महिला पत्रकार द्वारा प्रेस की आजादी को लेकर पूछे गए सवाल और उस पर हुई बहस का वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा.)
इटली से डील: चीन के ‘BRI’ का तोड़ और मेलोनी के साथ सेल्फी
दौरे के आखिरी पड़ाव पर 19 मई को पीएम मोदी इटली पहुंचे. वहां उनकी मुलाकात इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से हुई. दोनों नेताओं के बीच की केमिस्ट्री ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं, जहां दोनों ने ऐतिहासिक कोलोजियम में सेल्फी ली. लेकिन इस दोस्ती के पीछे भारत के लिए दो बेहद गंभीर और बड़े समझौते भी हुए.
भारत और इटली ‘इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं. इस प्रोजेक्ट की घोषणा 2023 में दिल्ली के जी-20 शिखर सम्मेलन में हुई थी. इसके तहत भारत को रेलवे, जहाजों और बंदरगाहों के नेटवर्क के जरिए मिडिल ईस्ट होते हुए सीधे यूरोप से जोड़ा जाएगा.
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन को जवाब: चीन अपने ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के जरिए पूरी दुनिया में अपना व्यापारिक रास्ता बना रहा है. IMEC को चीन के इसी प्रोजेक्ट के जवाब के रूप में देखा जा रहा है.
समय और पैसे की बचत: इटली यूरोप का एक बड़ा समुद्री व्यापारिक केंद्र है. इस नए रास्ते के बनने से भारत से यूरोप सामान भेजने का समय और लागत करीब 30 से 40% तक कम हो जाएगी, जिससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को बंपर मुनाफा होगा.
पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास डिजिटल तकनीक का बेहतरीन ढांचा (जैसे यूपीआई आदि) है और इटली के पास शानदार औद्योगिक तकनीक है. अब दोनों देश मिलकर एक सुरक्षित और जिम्मेदार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी सिस्टम तैयार करेंगे.
इसके साथ ही भारत और इटली ने अपने रिश्तों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का दर्जा दिया है और साल 2029 तक आपसी व्यापार को 14 अरब यूरो से बढ़ाकर 20 अरब यूरो (करीब 1.80 लाख करोड़ रुपए) से पार ले जाने का लक्ष्य रखा है.
पीएम मोदी का यह 140 घंटे का दौरा सिर्फ एक औपचारिक विदेश यात्रा नहीं था, बल्कि यह भारत की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का एक बड़ा कदम था. यूएई से तेल का इंतजाम करके भारत ने ऊर्जा संकट को दूर किया, नीदरलैंड्स से चिप और मिनरल्स की डील करके चीन पर निर्भरता कम की, स्वीडन और नॉर्वे से भविष्य की ग्रीन एनर्जी की नींव रखी और अंत में इटली के साथ मिलकर चीन के व्यापारिक रूट को टक्कर देने की तैयारी कर ली. कुल मिलाकर, यह दौरा आने वाले समय में भारत को एक आत्मनिर्भर वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में बेहद कारगर साबित होने वाला है.
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