Diwali 2025: दिवाली पूरे भारतवर्ष का सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार है. ये केवल एक पर्व नहीं बल्कि खुशियों, आशा और एकता का प्रतीक है. इस पर्व को सनातन धर्म में अच्छाई पर बुराई का प्रतीक माना जाता है. दिवाली का पर्व इतना बड़ा और खास है कि समय के साथ ये सीमाओं के पार पहुंच चुका है. इस पर्व को केवल भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी मनाया जाता है. आज भारत से लेकर अमेरिका, लंदन, सिंगापुर और मॉरीशस तक दिवाली के पर्व पर दीप जगमगाते है. आइए जानते हैं किन विदेशी देशों में इस पर्व को मनाया जाता है.
भारत का यह प्रमुख पर्व उसका पड़ोसी देश नेपाल ‘तिहार’ या ‘स्वान्ति’ के नाम से मनाता है. यहां यह त्योहार पांच दिनों का होता है. पहले दिन कौवे, दूसरे दिन कुत्ते की पूजा की जाती है. तीसरे दिन माता लक्ष्मी की आराधना होती है. चौथे दिन को नेपाल वासी नए वर्ष की तरह मनाते है और पांचवां दिन भाई दूज मनाया जाता है जिसे वहां पर भाई टीका कहा जाता है.
भारत की तरह श्रीलंका में भी दिवाली का संबंध रामायण से ही जुड़ा है. वहां ऐसा माना जाता है कि जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर विभीषण को लंका का राजा बनाया, तब बुराई पर अच्छाई की जीत हुई. इसके प्रतीक श्री लंका वासियों ने दीप जलाए जिसके बाद हर वर्ष कार्तिक मास के दिन यानी दिवाली पर दीपक जलाकर इस त्योहार को मनाने की परंपरा शुरू हो गई.
यह पर्व इतना प्रख्यात है कि केवल पड़ोसी देश ही नहीं बल्कि भारत की सीमा से काफी दूर विदेशी देशों में भी मनाया जाता है. सिंगापुर में इस मौके पर पूर्ण अवकाश के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें भारतीय संगीत को भी शामिल किया जाता है. इस पर्व को केवल सिंगापुर में ही नहीं, मलेशिया में भी खूब धूमधाम से मनाया जाता है. वहां हिंदू सूर्य कैलेंडर के सातवें महीने में दिवाली मनाई जाती है.
कनाडा के शहर टोरंटो और वैंकूवर में दिवाली को बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है. यहां बड़े-बड़े मेले, संगीत कार्यक्रम और आतिशबाजी होती है. दरअसल यह पर्व यहां पर हर साल 5 नवंबर को मनाया जाता है, जिसे न्यूफाउंडलैंड ट्रेडिशन के नाम से जाना जाता है. यह गाइ फॉक्स नाइट दिवाली की ही तरह दिखती है, जिसमें लोग रोशनी और पटाखों के साथ जश्न मनाते हैं.
मॉरीशस में दिवाली सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाई जाती है. लोग अपने घरों को दीपों से सजाते हैं और मिठाइयां बांटते हैं. त्रिनिदाद एंड टोबैगो में भी यह त्योहार राष्ट्रीय अवकाश है, जहां हिंदू ही नहीं बल्कि हर धर्म के लोग मिलकर इसे मनाते हैं.
दिवाली आज विश्वभर में भारतीय संस्कृति की पहचान बन चुकी है. यह त्योहार जहां भी मनाया जाता है, वहां रोशनी के साथ इंसानियत, एकता और प्रेम की नई ज्योति जलाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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