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Indian Festival

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन देशभर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिरों के बाहर लग गईं। चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की और व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कामना की।

होली का नाम सुनते ही गुलाल और मस्ती का ख्याल आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में होली के नाम और मनाने के तरीके अलग-अलग राज्यों में कितने भिन्न हैं? आइए जानते हैं भारत की विविध होली परंपराओं के अनसुने किस्से.

Chhath Puja 2025: इस वर्ष छठ पूजा पर देशभर में ₹38,000 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान है. यह पर्व आस्था, सामाजिक एकता और 'आत्मनिर्भर भारत' का प्रतीक है.

Diwali 2025: दिवाली पूरे भारतवर्ष का सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार है. ये केवल एक पर्व नहीं बल्कि खुशियों, आशा और एकता का प्रतीक है. इस पर्व को सनातन धर्म में अच्छाई पर बुराई का प्रतीक माना जाता है.

पटना में शारदीय नवरात्रि का आरंभ श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत स्वरूप के साथ हुआ है। नौलखा मंदिर में बाबा नागेश्वर पिछले 29 वर्षों से एक अनोखी परंपरा निभा रहे हैं। वे उपवास रहकर अपने सीने पर 21 कलश स्थापित करते हैं और माता की आराधना में लीन रहते हैं। यह कठिन साधना भक्तों के लिए आस्था की मिसाल है। नवरात्रि पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और हर कोई बाबा नागेश्वर की तपस्या को नमन कर रहा है। भारत एक्सप्रेस संवाददाता आशुतोष कुमार ने इस मौके पर बाबा नागेश्वर और मंदिर व्यवस्थापक से खास बातचीत की, देखिए हमारी ये रिपोर्ट...