Diwali Ke Upay: सनातन धर्म की परंपरा में कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाने वाला दीपावली महापर्व भगवती महालक्ष्मी की आराधना का सर्वोच्च और सबसे पुण्य फलदायी कालखंड माना गया है. भौतिक जीवन में सुख, शांति, मान-सम्मान और ऐश्वर्य का संचय बिना आद्यशक्ति महालक्ष्मी की अनुकंपा के संभव नहीं है.
पौराणिक इतिहास और श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार-
जब देवों और दानवों ने मिलकर क्षीरसागर में समुद्र मंथन किया, तब उसमें से 14 दिव्य रत्नों का प्राकट्य हुआ. कार्तिक मास की घोर अंधियारी अमावस्या तिथि को ही उन चौदह रत्नों में सर्वश्रेष्ठ भगवती महालक्ष्मी प्रकट हुईं और उन्होंने जगतपालक भगवान श्रीहरि विष्णु के वक्षस्थल पर वरमाला अर्पित की. यही कारण है कि दिवाली की महारात्रि को शास्त्रों में ‘कालरात्रि’ और ‘सुखरात्रि’ की संज्ञा दी गई है, जिसमें किए गए जप, तप, दान और शास्त्रीय उपाय कभी निष्फल नहीं होते.
वर्ष 2026 में 5 दिवसीय दीपोत्सव 6 नवंबर (धनतेरस) से 11 नवंबर (भाई दूज) तक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. कालदर्शक और प्रमुख पंचांगों के अनुसार, दिवाली के इन पावन दिनों में शास्त्रों में वर्णित निम्नलिखित 16 अचूक उपाय करने से दरिद्रता का नाश होता है और घर में कुबेर व लक्ष्मी का स्थायी वास बनता है:
दीपावली के पांचों प्रमुख पर्वों—धनतेरस, रूप चतुर्दशी, महालक्ष्मी पूजन, गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) और यम द्वितीया (भाई दूज)—पर प्रतिदिन शाम को 5 दीपक (4 छोटे और 1 बड़ा चौमुखा दीपक) प्रज्वलित करें. शास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि दीपक को कभी भी सीधे जमीन पर न रखें. जमीन पर पहले शुद्ध कुमकुम से अष्टदल बनाएं, उस पर खील, बासमती चावल अथवा गेहूं की ढेरी का ‘आसन’ बिछाएं और उसके ऊपर दीपक स्थापित करें. इससे घर में धन की आवक वर्ष भर निर्बाध बनी रहती है.
दिवाली के दिन सूर्योदय के समय किसी प्राचीन लक्ष्मी मंदिर या श्री राधा-कृष्ण मंदिर जाएं. मां लक्ष्मी को लाल या गुलाबी रंग की रेशमी पोशाक, इत्र और सुगंधित धूपबत्ती अर्पित करें. कनकधारा स्तोत्र का पाठ करते हुए प्रार्थना करें. इससे अवरुद्ध हुए आय के सभी मार्ग स्वतः खुलने लगते हैं.
शास्त्रों में गृहलक्ष्मी यानी पत्नी को साक्षात महालक्ष्मी का विग्रह माना गया है. दिवाली पूजन के शुभ मुहूर्त से ठीक पहले अपनी धर्मपत्नी को लाल रेशमी साड़ी या वस्त्र उपहार स्वरूप भेंट करें. पत्नी के प्रसन्न और सम्मानित होने से घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास सदा-सदा के लिए बना रहता है.
दिवाली की मध्यरात्रि को घर के मुख्य द्वार की देहरी और प्रत्येक कमरे के ईशान कोण में सवा मुट्ठी साबुत गेहूं की ढेरी बनाएं. उसके ऊपर गाय के शुद्ध घी का एक-एक दीपक प्रज्वलित करें. यह प्राचीन वास्तु-सम्मत प्रयोग नकारात्मक तरंगों को जलाकर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.
महालक्ष्मी का एक स्वरूप ‘गजलक्ष्मी’ का है, जिन्हें ऐरावत हाथी गन्ने का रस अर्पित करते हैं. दिवाली की सुबह खेत या बाजार से जड़ समेत हरा गन्ना लाकर घर में रखें. रात्रि पूजन में श्री लक्ष्मी-गणेश जी के साथ गन्नों को खड़ा कर रोली-अक्षत से उनकी विधिवत पूजा करें. इससे कृषि, व्यापार और स्थायी संपत्ति में निरंतर वृद्धि होती है.
दिवाली की रात परिवार के सभी सदस्यों के सिर से सात बार मुट्ठी भर काले तिल और थोड़ी राई उबारें (उसारें). इसके बाद इसे घर की उत्तर दिशा अथवा मुख्य देहरी के बाहर फेंक दें. मान्यता है कि इससे घर पर लगी किसी भी प्रकार की बुरी नजर, तंत्र दोष और अनावश्यक धन हानि तुरंत रुक जाती है.
शास्त्रों में निर्देश है कि दिवाली की महारात्रि को महालक्ष्मी के आगमन के साथ ही ‘दरिद्रता विसर्जन’ भी अनिवार्य है. लक्ष्मी पूजन संपन्न होने के उपरांत पूरे घर में, विशेषकर अंधेरे कोनों और स्टोर रूम में शंख, घंटी और डमरू की तेज ध्वनि करें. इस नाद से नकारात्मक ऊर्जा (अलक्ष्मी) घर से निष्कासित होती है और शुभता का प्रवेश होता है.
मुख्य प्रवेश द्वार के दोनों ओर कुमकुम से शास्त्रोक्त स्वस्तिक बनाएं. उसके नीचे बासमती चावल की छोटी ढेरी बनाएं और एक साबुत पूजा सुपारी को लाल कलावा (मौली) में लपेटकर उस पर रख दें. यह व्यापारिक उन्नति और गृह शांति का सिद्ध उपाय है.
गोमती नदी से प्राप्त होने वाले सुदर्शन चक्र चिह्न युक्त गोमती चक्र साक्षात नारायण के प्रतीक हैं. दिवाली की रात 9 गोमती चक्रों को गंगाजल और कच्चे दूध से स्नान कराकर हल्दी-कुमकुम का तिलक लगाएं. महालक्ष्मी पूजन के समय ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं नमः’ मंत्र से अभिमंत्रित कर इन्हें पीले या लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दें.
अमावस्या तिथि पितरों की भी तिथि होती है. दिवाली के दिन दोपहर के समय तिल और जल से अपने पितरों का तर्पण करें. शाम को घर के दक्षिण दिशा में एक दीपक पितरों के निमित्त जलाएं. इसके साथ ही किसी जरूरतमंद, वृद्ध या निर्धन व्यक्ति को भरपेट भोजन कराएं और गर्म वस्त्र या अन्न का दान करें. पितरों के आशीर्वाद से वंश वृद्धि और धन स्थिरता मिलती है.
दिवाली के दिन सूर्यास्त के ठीक बाद किसी प्राचीन पीपल के वृक्ष के नीचे जाएं (शास्त्रों के अनुसार अमावस्या की शाम पीपल में त्रिदेवी और श्रीहरि का वास होता है). वहां सरसों या तिल के तेल का एक चौमुखा दीपक जलाएं, पीपल को सात बार प्रणाम कर अपनी आर्थिक मनोकामना कहें और सीधे घर लौट आएं. ध्यान रहे कि लौटते समय पीछे मुड़कर बिल्कुल न देखें.
यदि अथक परिश्रम के बाद भी धन हाथ में नहीं रुकता, तो नरक चतुर्दशी की शाम एक लाल रेशमी कपड़े में शुद्ध लाल चंदन की लकड़ी, पांच साबुत लाल गुलाब की पत्तियां और थोड़ी रोली रखकर उसकी पूजा करें. दिवाली पूजन में भी इसे रखें और अगले दिन इसे अपनी तिजोरी या गल्ले में सुरक्षित रख दें. इससे धन का अपव्यय बंद होता है और बरकत होती है.
झाड़ू को शास्त्रों में मां लक्ष्मी का प्रतीक माना गया है. दिवाली के दिन बाजार से एक नई सींक या फूल झाड़ू खरीदकर लाएं. सायंकाल पूजन से पूर्व उससे घर के मंदिर और मुख्य कमरे में हल्की प्रतीकात्मक सफाई करें और फिर उसे ढककर किसी एकांत स्थान पर रख दें. अगले दिन प्रातःकाल से उसी झाड़ू से नियमित सफाई प्रारंभ करें. इससे पुरानी दरिद्रता का समूल नाश होता है.
तंत्र और लक्ष्मी शास्त्रों में कौड़ी और काली हल्दी को दुर्लभ समृद्धि कारक माना गया है. दिवाली की रात 5 साबुत काली हल्दी की गांठें और 5 पीली कौड़ियों को गंगाजल से शुद्ध कर चांदी की कटोरी या थाली में रखें. पूजन के समय उन पर केसर और अक्षत चढ़ाएं. अगले दिन प्रातःकाल शुभ चौघड़िया मुहूर्त में इन्हें लाल वस्त्र में लपेटकर अपने लॉकर या कैश बॉक्स में रख दें.
दुकानदारों और व्यवसायियों के लिए यह अचूक प्रयोग है. दिवाली की रात दुकान बंद करते समय एक साबुत फिटकरी का बड़ा टुकड़ा लेकर उसे पूरी दुकान के चारों कोनों में और मुख्य गल्ले के ऊपर 7 बार क्लॉकवाइज घुमाएं. इसके बाद किसी निर्जन तिराहे या चौराहे पर जाकर उसे उत्तर दिशा की ओर उछाल दें. इस प्रयोग से व्यापारिक बंधन कटते हैं, ग्राहकों की आवाजाही बढ़ती है और आय में अप्रत्याशित उछाल आता है.
दिवाली की महारात्रि में किसी भी सिद्ध मुहूर्त में उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें. सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर आदिगुरु शंकराचार्य रचित ‘कनकधारा स्तोत्र’ और ऋग्वेदोक्त ‘श्रीसूक्त’ के 16 मंत्रों का 11 बार सस्वर पाठ करें. यह पाठ आर्थिक अभावों को जड़ से मिटाने वाला महा-मंत्र प्रयोग सिद्ध होता है.
शास्त्रों का मत है कि इन उपायों को करते समय मन में पूर्ण श्रद्धा, पवित्रता और अटूट विश्वास का होना अनिवार्य है. विधिपूर्वक किए गए इन धार्मिक अनुष्ठानों से गृहस्थ जीवन में मां लक्ष्मी, सरस्वती और गणेश जी की कृपा से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की सहज प्राप्ति होती है.
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