Abstinence During Navratri: हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत बड़ा महत्व है. यह वह समय है जब माता आदिशक्ति अपने नौ रूपों के साथ धरती पर निवास करती हैं. इस दौरान, भक्त अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा का विकास करने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं और अपने जीवन को एक नई दिशा देने की कोशिश करते हैं. नवरात्रि का यह पवित्र समय शारीरिक और मानसिक शुद्धता की प्राप्ति का भी समय माना जाता है.
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नवरात्रि के दौरान जिस घर में पूजन किया जा रहा हो, वहां के दंपति को इस विशेष समय में यौन संबंध से बचने की सलाह दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि यदि इस समय यौन संबंध बनाए जाते हैं तो भक्त का मन माता की पूजा और आराधना में नहीं लगता.
नतीजतन, उनकी साधना अपूर्ण रह जाती है और मानसिक शांति नहीं मिलती है. इस समय संयमित जीवन जीने की सलाह दी जाती है ताकि व्यक्ति अपनी साधना में पूरी तरह से समर्पित हो सके.
विज्ञान के अनुसार, नवरात्रि के दौरान व्रत रखने से शरीर की ऊर्जा में कमी आ जाती है. इसके कारण व्यक्ति शारीरिक और मानसिक तौर पर यौनाचार के लिए तैयार नहीं रहता है. नवरात्रि के व्रत में शरीर की ऊर्जा की मांग होती है, और यौनाचार से बचने का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक स्थिति को संतुलित बनाए रखना है. इस समय संयम रखने से व्यक्ति के भीतर की ऊर्जा संरक्षित रहती है, जो उसे आध्यात्मिक साधना में मदद करती है.
धार्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नवरात्रि के दिनों में माता रानी का धरती पर वास होता है. माना जाता है कि माता रानी का अंश हर स्त्री में मौजूद होता है. यही कारण है कि नवरात्रि के समय विशेष रूप से सुहागन महिलाओं को सुहाग सामग्री देने की परंपरा भी है. इस समय ब्रह्मचर्य का पालन और संयम रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि व्यक्ति अपने आंतरिक शक्ति और ऊर्जा को सही दिशा में लगा सके.
विज्ञान के अनुसार, नवरात्रि के दौरान ऋतु परिवर्तन भी होता है. आश्विन और चैत्र नवरात्र के दौरान शीत और ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है. यह मौसम संक्रमण के लिहाज से सबसे संवेदनशील होता है, और इस समय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव आता है.
हमारे ऋषि-मुनियों ने इस समय शरीर को तैयार करने और रोगों से बचने के लिए व्रत और साधना का विधान बताया है. यौनाचार से बचने का उद्देश्य शरीर की ऊर्जा को संरक्षित करना और स्वस्थ रहना है, ताकि व्यक्ति संक्रमण से बच सके और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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