आस्था

क्या आपने सुना है? यहां सचमुच बीमार हो गए हैं भगवान जगन्नाथ स्वामी, जानें क्या है पूरी कहानी

Panna Rath Yatra 2026: मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक बेहद अनोखी और आस्था से जुड़ी खबर सामने आई है. यहां के ऐतिहासिक जगन्नाथ स्वामी मंदिर में राजशाही जमाने से चली आ रही परंपरा के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर अत्यधिक स्नान करने की वजह से भगवान जगन्नाथ स्वामी को लू लग गई है और वे बीमार हो गए हैं. जिसके कारण मंदिर के कपाट अगले 15 दिनों के लिए भक्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं (MP Jagannath Temple).

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित ऐतिहासिक जगन्नाथ स्वामी मंदिर में 175 साल पुरानी अनूठी परंपरा के तहत ज्येष्ठ पूर्णिमा पर औषधीय जल से स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा बीमार हो गए हैं. लू लगने के कारण भगवान को एकांतवास (अनासर काल) में रखा गया है और मंदिर के कपाट अगले 15 दिनों के लिए भक्तों के लिए बंद कर दिए गए हैं. इस दौरान मंदिर के वैद्य जी द्वारा उनके भोजन में बदलाव कर केवल विशेष काढ़ा और पथ्य दिया जाएगा. इस रस्म के संपन्न होने के साथ ही पन्ना के प्रसिद्ध ऐतिहासिक रथ यात्रा महोत्सव का आगाज भी हो गया है.

आखिर क्या है अनूठी परंपरा?

क्या आपने कभी सुना है कि पूरी दुनिया का पालन-पोषण करने वाले भगवान खुद भी कभी बीमार पड़ सकते हैं? सुनने में भले ही यह अजीब लगे, लेकिन बुंदेलखंड के पन्ना जिले में स्थित भगवान जगन्नाथ स्वामी के प्राचीन मंदिर में यह अनूठी परंपरा पिछले 175 से अधिक वर्षों से पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. हर साल की तरह इस बार भी भगवान जगन्नाथ, अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ बीमार हो गए हैं.

ऐतिहासिक रथ यात्रा महोत्सव का आगाज (Panna Temple Doors Closed)

दरअसल, आज सुबह राज परिवार की विशेष उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान की ‘स्नान यात्रा’ की रस्म अदायगी की गई. इस दौरान भगवान को धूप में औषधीय जल से स्नान कराया गया, जिसके बाद उन्हें लू लग गई. भगवान के बीमार पड़ते ही मंदिर में विशेष उपचार और राजशाही जमाने के नियमों का पालन शुरू कर दिया गया है. इसी के साथ पन्ना के ऐतिहासिक रथ यात्रा महोत्सव का शुरुआत भी हो गया है.

अगले 15 दिनों तक दिनचर्या और भोजन व्यवस्था बदली (Jagannath Swami Sick Panna)

भगवान जगन्नाथ के बीमार होने के बाद अब अगले 15 दिनों तक उनकी दिनचर्या और भोजन व्यवस्था पूरी तरह बदल दी जाएगी. इस ‘अनासर काल’ (एकांतवास) के दौरान उन्हें सामान्य भोजन की जगह केवल विशेष पथ्य और काढ़ा अर्पित किया जाएगा. मंदिर के वैद्य जी द्वारा रोज सुबह-शाम भगवान को दवाइयां दी जाएंगी. ठीक होने के बाद भगवान स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देंगे और भव्य रथ यात्रा पर निकलेंगे.

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-भारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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