श्रीबांके बिहारी मंदिर, वृंदावन
Banke Bihari Temple: दीपावली के पांच दिवसीय दीपोत्सव और पूरे कार्तिक मास के दौरान वृंदावन स्थित आराध्य श्रीबांकेबिहारी जी के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. इस विशाल जनसैलाब को नियंत्रित करने और आम श्रद्धालुओं को धक्कों व भारी भीड़ की अव्यवस्था से बचाकर सुलभ दर्शन कराने के उद्देश्य से मंदिर प्रबंधन ने नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है.
वृंदावन के लक्ष्मण शहीद स्मारक भवन स्थित कार्यालय में श्रीबांकेबिहारी मंदिर हाईपावर्ड मैनेजमेंट कमेटी की एक उच्चस्तरीय बैठक कमेटी के अध्यक्ष अशोक कुमार की अध्यक्षता में संपन्न हुई. बैठक के उपरांत अध्यक्ष व अन्य सदस्यों ने मंदिर पहुंचकर ठाकुर जी के दर्शन किए और सेवायत गोस्वामियों के साथ मिलकर नई दर्शन व्यवस्था की व्यावहारिक रूपरेखा पर गहन विचार-विमर्श किया.
मंदिर के संकरे परिक्रमा मार्ग और प्रांगण में श्रद्धालुओं को दबाव व भगदड़ जैसी स्थितियों से सुरक्षित रखने के लिए कमेटी एक विशेष पंजीकरण व्यवस्था पर विचार कर रही है:
एक दिन पहले रजिस्ट्रेशन: वीआईपी प्रोटोकॉल के तहत आने वाले विशिष्ट अतिथियों, उनके परिजनों तथा सेवायत गोस्वामियों के यजमानों/शिष्यों के लिए दर्शन हेतु एक दिन पूर्व पंजीकरण (अग्रिम बुकिंग) की व्यवस्था प्रस्तावित की जा रही है.
गोस्वामियों से समन्वय: कमेटी के अनुसार, मंदिर के पारंपरिक सेवायत गोस्वामियों के सुझावों और जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा के बाद ही इस नियम को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि आम भक्तों के नियमित दर्शन में कोई व्यवधान न आए.
करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र: वृंदावन का श्रीबांकेबिहारी मंदिर उत्तर भारत के सबसे प्रतिष्ठित और जागृत वैष्णव तीर्थस्थलों में से एक है. सामान्य दिनों में यहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार और त्योहारों (जन्माष्टमी, होली, दिवाली, नववर्ष) पर प्रतिदिन 2 से 3 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं. पूरे साल में करीब 2 से 3 करोड़ से अधिक भक्त ठाकुर जी के श्रीचरणों में शीश नवाने आते हैं.
इतिहास और स्थापना: ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी के विग्रह का प्राकट्य 16वीं सदी में स्वामी हरिदास जी की अनन्य साधना और भक्ति से निधिवन में हुआ था. बाद में उनके शिष्यों और गोस्वामी समाज के सहयोग से वर्ष 1864 में वर्तमान भव्य राजस्थानी शैली के मंदिर का निर्माण कराया गया. मंदिर में ठाकुर जी की सेवा-पूजा की पारंपरिक जिम्मेदारी और व्यवस्थाओं का संचालन मुख्य रूप से स्वामी हरिदास जी के वंशज सेवायत गोस्वामी समाज द्वारा ही पीढ़ियों से निभाया जा रहा है, जिसकी प्रशासनिक व न्यायिक निगरानी के लिए न्यायालय द्वारा हाईपावर्ड कमेटियों का गठन किया गया है.
₹500 करोड़ से अधिक का प्रस्तावित कॉरिडोर: काशी विश्वनाथ धाम और अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि परिसर की तर्ज पर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार वृंदावन में श्रीबांकेबिहारी मंदिर कॉरिडोर का निर्माण कराने की दिशा में प्रयासरत है. लगभग ₹500 करोड़ से अधिक की अनुमानित लागत से प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर परियोजना का मुख्य उद्देश्य यमुना तट से सीधे मंदिर तक चौड़ा व सुगम मार्ग बनाना, विशाल होल्डिंग एरिया, जूता घर, पेयजल, चिकित्सा और आधुनिक सुविधाएं विकसित करना है, जिससे भविष्य में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को भीड़ के संकट से स्थायी मुक्ति मिल सके.
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