पूरी दुनिया में रह रहे एक अरब से ज्यादा हिंदु अनुयायी आज अपने आराध्य के मनुष्य अवतार ‘श्रीकृष्ण’ का 5253वां जन्मोत्सव मना रहे हैं. सौर गणना (यानी मानव वर्षों) के अनुसार, स्वयं परमेश्वर ने द्वापर युग के अंतिम चरण में श्रीकृष्ण अवतार धारण किया था. वे 5,252 साल पहले पृथ्वी पर द्विभुज रूप में यानी बिल्कुल हम जैसी देह में समाज के बीच जन्मे थे. मनुज रूप में उन्होंने 125 वर्ष 8 माह बिताए और उसके बाद वापस अपने परम धाम लौट गए थे.
आज हम लोग 5253वें श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा कर रहे हैं. BharatExpress.Com हर वर्ष की तरह इस बार भी, आपके लिए विशेष प्रस्तुति दे रहा है.
इस आलेख में जानिए औषधीय गुणों से भरपूर श्रीकृष्ण को प्रिय ‘कदम’ वृक्ष के बारे में. इसे कई इलाकों में कदम्ब भी कहा जाता है. हजारों साल पहले ब्रजभूमि में ‘कदम्ब’ के बहुत-से वन होते थे. समय के साथ इनका हृास हुआ. हालांकि, अभी भी भारत भूमि में कई बड़े क्षेत्रों में होते हैं.
प्रकृति ने ऐसे कई फल-फूल दिए हैं, जो न केवल देखने में सुंदर, स्वाद से भरपूर बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं. ऐसे ही एक फल का नाम कदम है, जो पोषक तत्वों से भरपूर है और भगवान श्री कृष्ण को भी अति प्रिय है.
बिहार सरकार के पर्यावरण, वन एवं जल विभाग ने लोगों को स्थानीय वृक्षों के महत्व से अवगत कराते हुए कदम कदम के वृक्ष की उपयोगिता और गुणों की विस्तृत जानकारी दी है. श्रीकृष्ण को प्रिय यह वृक्ष न केवल देखने में बेहद सुंदर है, बल्कि इसके फूल, फल और छाल औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. कदम एक विशाल और सदाबहार वृक्ष है.
इसकी सबसे खास पहचान इसके सुगंधित, गोलाकार और नरम पीले फूल हैं, जो दूर से ही अपनी मिठास भरी खुशबू फैलाते हैं. इन फूलों की सुगंध और सौंदर्य के कारण इन्हें भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय माना जाता है. विभाग का मानना है कि कदम का वृक्ष सौंदर्य, स्वास्थ्य, औषधीय गुणों और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम है.
सेहत के लिए भी कदम फायदेमंद है और इसके सेवन से कई अद्भुत लाभ मिलते हैं. कदम के फूल और फल दोनों ही खाने योग्य हैं. स्थानीय परंपराओं में इसके फूलों और फलों से स्वादिष्ट चटनी व अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं. कदम में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसके नियमित उपयोग से पाचन तंत्र मजबूत होता है. यह पेट की समस्याओं जैसे अपच, दस्त में भी राहत देता है.
साथ ही रक्त शुद्धि होती है और त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है. मुंह की सेहत के लिए भी कदम फायदेमंद है. इसकी छाल से कुल्ला करने पर मसूड़ों की समस्या और मुंह की बदबू भी कम हो सकती है.
आयुर्वेद में कदम की छाल, पत्तियों और फूलों का उपयोग बुखार, मधुमेह, सूजन और तनाव कम करने जैसी समस्याओं के इलाज में किया जाता है. इसके फूलों का काढ़ा गले की खराश और खांसी में भी लाभकारी माना जाता है.
-भारत एक्सप्रेस
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