जहां शिवजी संग होली खेलते हैं कन्हैया, ये है वो प्रसिद्ध धाम
‘Harihar Milan’ Tradition: होली भारत का एक प्रमुख और उमंग भरा रंगों का त्योहार है, जिसका हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. 4 मार्च को देशभर में होली के त्योहार को विभिन्न रूप में मनाया जाएगा. भारत के अलग-अलग प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिरों में इस पारंपरिक पर्व की धूम रहेगी.
देश में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां होली के त्योहार को अनूठे अंदाज में मनाया जाता है. उन्हीं में से एक झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर है, जहां होली के पर्व से एक दिन पहले एक अनोखी धार्मिक परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘हरिहर मिलन’ के नाम से जाना जाता है. ‘हरि’ मतलब भगवान विष्णु और ‘हर’ मतलब देवाधिदेव महादेव.
इस साल द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में ‘हरिहर मिलन’ का आयोजन 3 मार्च को किया जाएगा. चंद्र ग्रहण के कारण मंगलवार को इस उत्सव का शुभारंभ सुबह 5.30 बजे से हो जाएगा.
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि ‘हरिहर मिलन’ के साथ ही देवघर और आसपास के इलाकों में होली का पावन पर्व शुरू हो जाता है. यह होली से पहले निभाई जाने वाली एक पौराणिक परंपरा है. इसी दिन बाबा बैद्यनाथ देवघर पधारे थे और इस पावन अवसर पर भगवान विष्णु (श्रीकृष्ण) अपने आराध्य भगवान शिव से मिलने देवघर आते हैं. फिर, दोनों देवता एक साथ होली खेलते हैं.
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहितों का कहना है, “हरिहर मिलन’ के दिन ही लंका नरेश रावण ने भगवान शिव को अपनी अपार भक्ति और कठोर तप से प्रसन्न करके उनसे जिद कर यह आग्रह किया था कि वो उनके साथ लंका चलेंगे. फिर भगवान शिव ने अपने परम भक्त रावण के जिद्द को पूरा करते हुए उसे यह वर दिया कि मैं शिवलिंग के रूप में लंका जाने के लिए तैयार हूं, लेकिन शर्त यह थी कि तुम यात्रा के दौरान कहीं भी मेरे शिवलिंग को नहीं रखोगे. उन्होंने कहा, “अगर लंका यात्रा के दौरान तुम मेरा शिवलिंग रास्ते में कहीं रखते हो, तो वहीं पर शिवलिंग स्थापित हो जाएगा.”
तीर्थ पुरोहितों ने आगे बताया कि जब रावण शिवलिंग को अपने हाथों में लेकर लंका की ओर जा रहे थे, तो रास्ते में भगवान विष्णु वृद्ध ब्राह्मण के वेश में नीचे खड़े थे. भगवान विष्णु बैद्यनाथ धाम के उसी स्थान पर खड़े थे, जहां माता सती का हृदय गिरा था. इस दौरान रावण को कुछ शंका हुई और वो जमीन पर उतर गए. वचनबद्ध होने के कारण रावण ने शिवलिंग को भगवान विष्णु के हाथ में दे दिया और हरि ने उसे स्थापित कर दिया. इस तरह माता सती और देवाधिदेव महादेव का देवघर में मिलन हुआ. तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि जिस शिवलिंग को भगवान विष्णु जी ने ग्रहण किया था, उसी के साथ वो श्रीकृष्ण के रूप में ‘हरिहर मिलन’ पर होली खेलते हैं.
मंदिर के तीर्थ पुरोहितों ने बताया, “‘हरिहर मिलन’ के दिन कन्हैया जी की प्रतिमा साल में एक बार मंदिर से बाहर निकलती है. भगवान श्रीकृष्ण बैजू मंदिर के पास जाकर झूला झूलते हैं. झूला झूलने के बाद भगवान श्रीकृष्ण आनंदित हो जाते हैं. भगवान आनंदित होकर परमानंद महादेव के पास आते हैं. फिर, दोनों गुलाल खेलते हैं.”
उन्होंने बताया, “‘हरिहर मिलन’ के खास दिन भगवान शिव को विशेष भोग लगता है. उन्हें मालपुआ चढ़ाया जाता है. इस दिन हर और हरि एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं. वहीं, ‘हरिहर मिलन’ के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपने स्थान पर लौट जाते हैं.”
यह भी पढ़िए: आखिर उज्जैन में ही क्यों जलाई जाती है पहली होलिका? जानें क्या है महाकाल के नगरी की परंपरा
Vrishabh Rashi Today Horoscope: वृषभ राशि वालों के लिए आज नए आइडिया और अवसर सामने…
Mithun Rashi Aaj Ka Rashifal: मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन पुराने…
Kark Rashifal: कर्क राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक मामलों में लाभ…
Singh Rashi Aaj Ka Rashifal: सिंह राशि के जातकों के लिए आज का दिन कामकाज…
Tula Rashi Aaj Ka Rashifal: तुला राशि के जातकों के लिए आज का दिन करियर…
Mesh Rashi Today Horoscope: मेष राशि वालों के लिए आज कामकाज और धन से जुड़े…