होली का जिक्र आते ही रंगों की मस्ती और खुशियों की फिजा याद आने लगती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूरे देश में होली की शुरुआत आखिर उज्जैन से ही क्यों होती है? बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में होली का अपना ही एक अलग आकर्षण है.
यहां परंपरा है कि जब तक ‘महाकाल’ के दरबार में होली की अग्नि नहीं जलती, तब तक कहीं और होलिका दहन नहीं होता. इस साल भी 2 मार्च को महाकाल मंदिर में हर्बल गुलाल के साथ होली का आगाज होगा और इसके बाद गोधूलि बेला में होलिका दहन की रस्म निभाई जाएगी.
महाकाल की नगरी में क्यों सबसे पहले होती है होली?
उज्जैन के लोगों की मान्यता है कि भगवान महाकाल इस पूरी सृष्टि के राजा हैं. इसलिए, किसी भी शुभ कार्य या त्योहार की शुरुआत उनके दरबार से ही होनी चाहिए. बाबा महाकाल को सबसे पहले फूलों का रस और हर्बल गुलाल अर्पित किया जाता है, जिसके बाद ही परंपराओं का पहिया पूरे देश में घूमता है. इस साल भी संध्या आरती के दौरान बाबा महाकाल को विशेष शक्कर की माला और रंगों के साथ सजाया जाएगा.
ग्रहण का साया और बदली हुई व्यवस्थाएं
इस बार की होली थोड़ी चुनौतीपूर्ण और खास है. खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण लग रहा है. इसका समय शाम 6:32 से 6:46 के बीच करीब 14 मिनट का है. इस खगोलीय घटना का असर मंदिर की व्यवस्थाओं पर भी पड़ा है. ग्रहण के सूतक काल और शुद्धिकरण की प्रक्रिया को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए हैं.
ग्रहण के दौरान मंदिर में नियमों का विशेष पालन किया जाएगा. सुबह की भोग आरती में भगवान को केवल शक्कर का भोग लगाया जाएगा. ग्रहण खत्म होते ही मंदिर परिसर का शुद्धिकरण होगा और बाबा महाकाल को पवित्र स्नान कराकर दोबारा विधि-विधान से पूजा की जाएगी.
मंदिर का आरती शेड्यूल
मंदिर प्रशासन ने गर्मियों के आगमन को देखते हुए आरतियों के समय में भी फेरबदल किया है, ताकि भक्तों को कोई असुविधा न हो. नया शेड्यूल कुछ इस प्रकार है:
- भस्म आरती: सुबह 04:00 से 06:00 बजे तक
- दद्योदक आरती: सुबह 07:00 से 07:45 बजे तक
- भोग आरती: सुबह 10:00 से 10:45 बजे तक
- संध्या पूजन: शाम 05:00 से 05:45 बजे तक
- संध्या आरती: शाम 07:00 से 07:45 बजे तक
- शयन आरती: रात 10:30 से 11:00 बजे तक
रंगपंचमी का भव्य इंतजार
होली के बाद उज्जैन का मिजाज और भी रंगीन हो जाता है. 8 मार्च को रंगपंचमी के मौके पर बाबा महाकाल का पारंपरिक ‘ध्वज चल समारोह’ निकाला जाएगा. यह आयोजन उज्जैन की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं. बाबा महाकाल के आंगन में होली खेलना अपने आप में एक दिव्य अनुभव है, जहां भक्त और पुजारी मिलकर एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं.
ये भी पढ़ें: होली पर आसमान में दिखेगा ब्लड मून, जानिए 3 मार्च 2026 का चंद्रग्रहण क्यों है खास?
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


