खेल

अखबार पढ़कर बेटी ने पकड़ा तीर-कमान, पड़ोसी को देखकर बना तीरंदाज; अब भारत को दिलाया 8वां गोल्ड

Asian Games 2026 India 8th Gold Medal: एशियन गेम्स में भारतीय तीरंदाजों ने एक बार फिर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया. कंपाउंड तीरंदाजी की मिश्रित टीम स्पर्धा में चित्रिका त्रिपाठी (Chikitha Taniparthi) और साहिल राजेश जाधव (Sahil Jadhav) की जोड़ी ने दक्षिण कोरिया को शूट ऑफ में हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इस जीत के साथ दोनों ने 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल कर लिया.

भारत के लिए यह दिन इसलिए भी खास रहा, क्योंकि तीरंदाजी में महिला कंपाउंड टीम ने भी गोल्ड जीता. भारतीय टीम ने फाइनल में चीन को 238-234 से मात दी. इसके करीब एक घंटे बाद चित्रिका और साहिल की जोड़ी ने मिश्रित टीम फाइनल में कोरिया को टाई-ब्रेक में हराकर दिन का दूसरा और भारत का आठवां स्वर्ण पदक झोली में डाल दिया.

किसान परिवार की बेटी हैं चित्रिका

चित्रिका त्रिपाठी का तीरंदाजी तक पहुंचने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. तेलंगाना से आने वाली चित्रिका एक किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उन्हें इस खेल से जोड़ने में उनके पिता की बड़ी भूमिका रही. जब चित्रिका दूसरी कक्षा में पढ़ती थीं, तब उनके पिता ने अखबार में तीरंदाजी से जुड़ी खबर पढ़ी और बेटी को इस खेल में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया.

चित्रिका ने 2018 में तीरंदाजी की शुरुआत की. धीरे-धीरे यह खेल उनके लिए महज एक गतिविधि नहीं रहा, बल्कि जुनून बन गया. परिवार के लगातार समर्थन ने भी उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया. 2021 में उन्होंने पेशेवर स्तर पर तीरंदाजी शुरू की.

साल 2025 उनके करियर के लिए बेहद खास रहा. विन्निपेग में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी यूथ चैंपियनशिप में उन्होंने अंडर-21 महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता. वह इस खिताब को जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. इसके बाद उन्होंने आर्चरी वर्ल्ड कप सर्किट में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया.

पड़ोसी को देखकर तीरंदाज बने साहिल

साहिल राजेश जाधव ने 2016 में तीरंदाजी शुरू की. इसकी वजह भी काफी दिलचस्प है. उनके पड़ोसी खुद तीरंदाज थे. उन्हें अभ्यास करते देखकर साहिल की इस खेल में रुचि पैदा हुई. स्कूल के दिनों में कई खेल खेलने वाले साहिल किसी एक खेल को गंभीरता से अपनाना चाहते थे. उन्होंने इसके बाद दृष्टि तीरंदाजी अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया.


ये भी पढ़ें: भारत की झोली में सातवां गोल्ड, चीन को हराकर महिला तीरंदाजों ने रचा इतिहास


हालांकि उनका सफर आसान नहीं रहा. आर्थिक परेशानियों के कारण 2022 में उन्होंने तीरंदाजी छोड़ने तक का मन बना लिया था. ऐसे समय में उनके माता-पिता, खासकर पिता, उनके साथ मजबूती से खड़े रहे. परिवार ने भरोसा दिया कि पैसों की दिक्कत के बावजूद उनका खेल नहीं रुकेगा.

2025 में साहिल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई और कई बड़े टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया. अब एशियन गेम्स का गोल्ड उनके करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

Recent Posts

अफसरशाही से जन-प्रतिनिधित्व तक: एके शर्मा ने कैसे बदली यूपी की बिजली और शहरी व्यवस्था

AK Sharma Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में एके शर्मा ने ऊर्जा और नगर विकास के…

13 minutes ago

मंदी का दौर खत्म! सोने-चांदी की कीमतों में फिर लौटी जोरदार तेजी; जानें आज के ताजा दाम

हफ्ते की शुरुआत में लुढ़कने के बाद अब सोने और चांदी की कीमतों में फिर…

24 minutes ago

मोबाइल पर स्क्रैच से आगबबूला हुई ‘कलयुगी मां’, मासूम बच्चों को जमकर पीटा; CCTV ने खोला राज

Mother Beats Children: फरीदाबाद में मोबाइल स्क्रीन पर स्क्रैच आने से गुस्साई महिला पर 6…

37 minutes ago

दिल्ली जल बोर्ड में इंटर्नशिप का सुनहरा मौका, हर महीने मिलेंगे ₹15,000; 15 अक्टूबर से पहले करें अप्लाई

दिल्ली जल बोर्ड ने यंग एक्वा लीडर्स इंटर्नशिप प्रोग्राम 2026 की घोषणा कर दी है.…

38 minutes ago

कांग्रेस की CWC मीटिंग में इस नेता ने क्यों लिया नीतीश कुमार का नाम, सोनिया गांधी ने क्या कहा?

Congress CWC Meeting में नीतीश कुमार के INDIA गठबंधन से बाहर जाने को लेकर चर्चा…

56 minutes ago

पाइप बिछाने से आगे की कहानी: कैसे स्वतंत्र देव सिंह ने बुंदेलखंड में पानी की किल्लत को दी चुनौती?

UP Politics: बुंदेलखंड में स्वतंत्र देव सिंह के पानी अभियान का मुख्य फोकस घर-घर नल…

1 hour ago