संदीप पाटिल (फोटो- ٰIANS)
भारत के बेहतरीन और शानदार क्रिकेटर संदीप मधुसूदन पाटिल न केवल एक शानदार बल्लेबाज थे बल्कि एक उपयोगी मध्यम गति के गेंदबाज भी थे. अपने अच्छे लुक, आक्रामक बल्लेबाजी का अंदाज और बड़े बड़े हिट के लिए जाने जाते हैं. पाटिल मैदान के अंदर और बाहर स्वाभाविक रूप से भीड़ को अपनी ओर आकर्षित करने वाले व्यक्ति थे. आज ही के दिन 18 अगस्त, 1956 को मुंबई, भारत में जन्मे पाटिल की क्रिकेट यात्रा असाधारण से कम नहीं थी.
भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने के बाद पाटिल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छा गए और अपने पहले ही दौरे पर उन्होंने अपनी उल्लेखनीय प्रतिभा का प्रदर्शन किया. एडिलेड की एक शानदार पारी में, पाटिल ने एक बेहद ही मजबूत ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिली और लेन पास्को के खिलाफ बेह्तरीन 174 रन बनाए और यह पारी और भी उल्लेखनीय थी क्योंकि पिछले टेस्ट में, पाटिल को 65 रन बनाने के बाद पास्को के एक तेज़ तर्रार बाउंसर से चोट लग गई थी.
1981-82 में इंग्लैंड के खिलाफ एक मध्यम श्रृंखला के बावजूद, पाटिल ने 1982 में इंग्लैंड दौरे के दौरान वापसी की. ओल्ड ट्रैफर्ड में, उन्होंने नॉट आउट 129 रन बनाकर और बॉब विलिस की गेंद पर एक ही ओवर में 24 रन बनाकर क्रिकेट इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया. ओवर, जिसमें लगातार छह चौके शामिल थे. हालाँकि, व्यक्तिगत मुद्दों के कारण उन्हें 1983 में वेस्टइंडीज दौरे के दौरान भारतीय टीम से बाहर होना पड़ा.
पाटिल के करियर में 1983 विश्व कप के दौरान एक अहम मोड़ आया, जहां उन्होंने भारत की ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि, उनकी आक्रामक बल्लेबाजी शैली कभी-कभार अनुशासनहीनता के कारण खराब परियां भी आयीं. जिसके कारण 1983-84 में पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के खिलाफ बाद के टेस्ट मैचों के दौरान उनके प्रदर्शन में गिरावट आई. अगले सीज़न में इंग्लैंड के खिलाफ अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, उन्हें केवल दो गेम के बाद बाहर कर दिया गया और फिर कभी टेस्ट क्रिकेट के लिए उनके नाम पर विचार नहीं किया गया. फिर भी, पाटिल ने खेल के छोटे प्रारूप में अपने असाधारण खेल से प्रभावित करना जारी रखा.
बॉम्बे टीम के साथ अपने कार्यकाल के दौरान, पाटिल ने अपने नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन किया और अपने प्रथम श्रेणी करियर के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता के साथ टीम की कप्तानी की. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, वह कोचिंग में लग गए, भारत ए और बाद में भारतीय राष्ट्रीय टीम के कोच के रूप में कार्य किया. उन्होंने केन्याई राष्ट्रीय टीम की कमान भी संभाली और उन्हें 2003 विश्व कप के सेमीफाइनल तक पहुंचाया.
ये भी पढ़ें- Paris Paralympics, जिसमें समर ओलंपिक के कुल पदक की संख्या का रिकॉर्ड तोड़ सकता है भारत
-भारत एक्सप्रेस
Nothing CEO Carl Pei: उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी नथिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कार्ल पेई…
Ayodhya Ram Mandir Donation Theft: सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई स्टेटस रिपोर्ट में बताया…
एशियन गेम्स 2026 के दूसरे दिन भारत ने निशानेबाजी और एमएमए (MMA) में 3 सिल्वर…
Australia Ageing Population: साल 2060 तक ऑस्ट्रेलिया की आबादी घटने लगेगी. यह देश के इतिहास…
भारत एक्सप्रेस के CMD एवं एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय दिल्ली में होने जा रहे 'हिंदी मेरी…
IIT Bombay Student Death:: IIT बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत के मामले में परिवार…