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अयोध्या चंदा चोरी के बाद बस्ती में CSR गबन का मामला: 4 नामजद, हरीश द्विवेदी से क्यों पूछे जा रहे सवाल?

राम मंदिर निर्माण के चंदे से जुड़े विवादों के बीच बस्ती जिले से बड़ा मामला सामने आया है. यह मामला CSR फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है. समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण और ग्रामीण विकास के लिए आवंटित सरकारी व निगमित संसाधनों की पवित्रता पर लगे इन आरोपों ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है. प्रतापगढ़ निवासी शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार अग्रवाल की तहरीर पर बस्ती शहर कोतवाली पुलिस ने जालसाजी, धोखाधड़ी और धमकी देने सहित कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है.

यह जनकल्याणकारी परियोजना वर्ष 2018 में क्षेत्र के तत्कालीन भाजपा सांसद हरीश द्विवेदी की अनुशंसा पर स्वीकृत हुई थी. एक जनप्रतिनिधि के रूप में जनहित के कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उन्होंने यह पहल की थी, लेकिन धरातल पर क्रियान्वयन करने वाली एजेंसी के पदाधिकारियों की मिलीभगत से हुए इस कथित घटनाक्रम ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

सवा करोड़ का बजट पर अधूरे पड़े काम

यह पूरा प्रकरण वर्ष 2018 का है, जब कोल इंडिया लिमिटेड की मिनीरत्न सहायक कंपनी ‘नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड’ (NCL), सिंगरौली ने बस्ती जिले के विकास के लिए बड़ी धनराशि स्वीकृत की थी. बस्ती जिले की 10 चयनित ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों की सुविधा के लिए आधुनिक सामुदायिक भवनों का निर्माण किया जाना था. इस काम के लिए कुल 1.25 रुपये बजट जारी किया गया था.

यह पूरी राशि भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड, बस्ती के नाम से बैंक ऑफ इंडिया की बस्ती शाखा में खोले गए खाता संख्या 717010110010081 में जमा कराई गई थी. आरोप है कि इस खाते का संचालन करने वाले चार नामजद व्यक्तियों पवन कुमार पाण्डेय (गोंडा), आशीष कुमार पाठक (लखनऊ), शिवेन्द्र प्रताप सिंह (बस्ती) और मोहम्मद आमिर (बस्ती) ने आपसी मिलीभगत और सुनियोजित साजिश के तहत अलग-अलग व्यक्तियों के नाम से चेक व माध्यमों के जरिए खाते में मौजूद पूरी की पूरी 1.25 करोड़ की राशि निकाल ली.

फर्जी कार्य-पूर्णता प्रमाणपत्र

धनराशि के आहरण के बाद आरोपियों ने चालाकी दिखाते हुए नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL), सिंगरौली को एक आधिकारिक ‘कार्य-पूर्णता प्रमाणपत्र’भी जमा कर दिया, जिसमें कागजों पर सभी 10 सामुदायिक भवनों का निर्माण पूरी तरह से संपन्न दिखा दिया गया. परंतु, इस कथित घोटाले की परतें तब खुलीं जब वास्तविक जमीनी हकीकत सामने आई. संबंधित ग्राम प्रधानों द्वारा जारी आधिकारिक पत्रों और निर्माण स्थलों की ताजी तस्वीरों से यह प्रमाणित हुआ कि धरातल पर सामुदायिक भवनों का निर्माण कार्य वास्तव में पूरा ही नहीं हुआ था.

विरोध करने पर जान से मारने की धमकी

शिकायतकर्ता जितेंद्र कुमार अग्रवाल, जो कि भारतीय को-ऑपरेटिव ग्रामीण विकास एवं निर्माण लिमिटेड, लालबाग लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष हैं, ने जब इस गंभीर गड़बड़ी और वित्तीय हेराफेरी का पुरजोर विरोध किया और रिकॉर्ड्स खंगालने की कोशिश की, तो नामजद आरोपियों ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, गाली-गलौज की और उन्हें जान से मारने की सीधी धमकी भी दी.

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सख्त धाराओं में FIR दर्ज

मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्ती कोतवाली पुलिस ने 3 जून 2026 को मुकदमा अपराध संख्या 0244 दर्ज कर लिया है. उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह को इस हाई-प्रोफाइल मामले की विवेचना सौंपी गई है. पुलिस ने चारों नामजद अभियुक्तों के खिलाफ तत्कालीन भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (लोक सेवक या बैंक मैनेजर द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 419 (प्रतिरूपण द्वारा छल), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का असली के रूप में उपयोग), 504 और 506 (जान से मारने की धमकी) के तहत मामला दर्ज किया है.

हरीश द्विवेदी से क्यों पूछे जा रहे हैं सवाल?

चूंकि साल 2018 में यह पूरी CSR परियोजना तत्कालीन लोकप्रिय सांसद हरीश द्विवेदी की आधिकारिक अनुशंसा और उनके द्वारा लिखे गए पत्र के बाद ही स्वीकृत हुई थी, इसलिए इस योजना की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन को लेकर अब प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं. लोगों का कहना है कि जनहित की यह फाइल 8 वर्षों तक ठंडे बस्ते में कैसे दबी रही? 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जब राजनीतिक समीकरण बदले, तब जाकर यह आवाज बुलंद हुई और अब एफआईआर दर्ज हो सकी है.

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कड़े प्रशासनिक ऑडिट की दरकार

जब तक एजेंसियों पर कड़ा प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण नहीं होगा, तब तक जनप्रतिनिधियों की अच्छी से अच्छी विकास योजनाएं भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी. पूर्व सांसद ने तो क्षेत्र के विकास के लिए एक सकारात्मक कदम उठाते हुए इस बजट की अनुशंसा की थी, लेकिन उनके पत्र का दुरुपयोग करके बीच के कारिंदों ने पूरी व्यवस्था को कलंकित करने का प्रयास किया. अब चूंकि पुलिस ने बैंक लेन-देन और कूटरचित दस्तावेजों की गहन पड़ताल शुरू कर दी है, तो यह उम्मीद की जा रही है कि पूर्व सांसद भी सामने आकर इस बात पर अपना कड़ा स्टैंड रखेंगे.

Bharat Express Desk

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