ट्रेंडिंग

क्या वाकई धुएं वाली गाड़ी से मर जाते हैं सारे मच्छर? जानें क्या है सच्चाई; हर साल दुनियाभर में इतने लोगों की मौत के जिम्मेदार होते हैं Mosquitos

Rainy Season: बारिश का मौसम शुरू हो चुका है. इससे पहले ही लोग मच्छरों के आतंक से बचने के लिए अपने-अपने घरों में व्यवस्था करने लगे हैं तो वहीं नगर निगम भी मोहल्ले व इलाकों में फॉगिंग करा रहा है. ताकि मच्छरों से होने वाली बीमारियां न फैलें. हालांकि फॉगिंग से क्या मच्छर वाकई में मर जाते हैं? इसको लेकर भी लोगों के मन में सवाल खड़े होते रहते हैं.

दुनिया भर में हो जाती है इतनी मौत

बता दें कि मच्छरों से होने वाली बीमारी से बचने के लिए सरकार लगातार अभियान चलाकर लोगों को कूलर में या फिर कहीं भी साफ पानी एकत्र न होने की सलाह देती है और घर के आस-पास साफ-सफाई को जोर देती है. इसी के साथ ही नगर-निगम भी साफ-सफाई का अभियान चलाता है तो वहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाई आदि का वितरण भी किया जाता है.

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि हर साल मच्छर दुनियाभर में एक मिलियन लोगों की मौत का जिम्मेदार होते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मच्छरों से होने वाली बीमारियाँ इंसानों के लिए बहुत बड़ी मुसीबत की तरह होती हैं. एक रिपोर्ट की मानें तो हर साल लगभग 390 मिलियन लोग डेंगू से संक्रमित होते हैं और लाखों लोग जीका, चिकनगुनिया और पीले बुखार से प्रभावित होते हैं.

ये भी पढ़ें-दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के संयुक्त सैन्य अभ्यास से बौखलाए किम जोंग उन ने की बड़ी कार्रवाई, उत्तर कोरिया ने दागे दो बैलिस्टिक मिसाइल

मर जाते हैं एडल्ट मच्छर

जानकार बताते हैं कि सायफेनोथ्रिन केमिकल को डीजल के साथ मिलाकर फॉगिंग की जाती है, जो इनडोर-आउटडोर दोनों होती है. ये एडल्ट मच्छरों को मारने का काम करती है. इन केमिकल्स का इस्तेमाल कर मच्छरों से लड़ा जा सकता है. बता दें कि गर्मी के बाद बारिश का मौसम शुरू होते ही डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि ये मच्छर हर मौसम में परेशान करते हैं, लेकिन बरसात में बीमारियां ज्यादा फैलाते हैं. इनसे बचने के लिए लोग घरों में लिक्विड मॉस्किटो मशीन का इस्तेमाल करते हैं. तो वहीं नगर निगम फॉगिंग करा कर लोगों को राहत देने की कोशिश करता है.

-भारत एक्सप्रेस

Archana Sharma

Recent Posts

उज्जैन में पत्थरबाजों की निकली हेकड़ी: दबोचे गए 20 उपद्रवी, मुंह छिपाते आए नजर

Ujjain Shahi Masjid controversy: उज्जैन शाही मस्जिद विवाद और पथराव के मामले में पुलिस ने…

11 minutes ago

निवेश से एक्सपोर्ट तक, कैसे यूपी बन रहा बिजनेस हब? जानें मंत्री नंद गोपाल नंदी की भूमिका

UP Investment Hub: उत्तर प्रदेश को निवेश और कारोबार का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिशों…

19 minutes ago

यंग तुर्क की विरासत: कैसे बलिया की क्रांति आज भी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक मिजाज को गढ़ रही?

Chandra Shekhar Young Turk: बलिया के पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को ‘यंग तुर्क’ कहा गया, लेकिन…

49 minutes ago

सनोज मिश्र सभी आरोपों से बरी, तीस हजारी कोर्ट ने दी क्लीन चिट; अब वसीम रिजवी का क्या?

फिल्म निर्देशक सनोज मिश्र को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले…

52 minutes ago

ग्रीन रिवोल्यूशन 2.0: कैसे सूर्य प्रताप शाही ने यूपी की कृषि अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाया

UP Agriculture में डिजिटल खेती, कृषि रिसर्च, प्राकृतिक खेती, सोलर पंप और बेहतर बाजार व्यवस्था…

1 hour ago

‘न पर्दा, न लाउडस्पीकर और न कोई ताम झाम!’ लालटेन की रोशनी में मंचन, यूनेस्को धरोहर ‘रामनगर रामलीला’ की अनकही कहानी

Ramnagar Ramlila: वाराणसी के रामनगर की रामलीला 220 साल से ज्यादा पुरानी जीवंत परंपरा है,…

1 hour ago