यूटिलिटी

किसानों के लिए अच्छी खबर: जीरो बजट में घर पर ही बनाए उर्वरक, ‘जीवामृत’ से घटाएं खाद का भारी खर्च

आज के समय में खेती-किसानी पहले जैसी आसान नहीं रही. एक तरफ आसमान से बरसती बेमौसम बारिश और जलवायु परिवर्तन की मार है, तो दूसरी तरफ मिट्टी की घटती ताकत ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है. फसल अच्छी पाने के चक्कर में हम खेतों में धड़ल्ले से रासायनिक खाद (Chemical Fertilizer) और कीटनाशक डाल रहे हैं, लेकिन इसका नतीजा क्या निकल रहा है? जमीन पथरीली होती जा रही है, खेती की लागत बढ़ रही है और जो अनाज हमारी थाली तक पहुँच रहा है, वह भी जहरीला होता जा रहा है.

क्या और क्यों खास है ‘जीवामृत’

ऐसे में देश के कई प्रगतिशील किसान अब एक पुराने लेकिन बेहद असरदार नुस्खे ‘जीवामृत’ की ओर लौट रहे है. जीवामृत कोई साधारण खाद नहीं है, बल्कि यह मिट्टी के लिए एक ‘संजीवनी’ की तरह काम करता है. सरल शब्दों में कहें तो यह लाभकारी सूक्ष्मजीवों (Microbes) का एक घोल है. जब हम इसे मिट्टी में डालते हैं, तो यह जमीन में सोए हुए उन मित्र कीटों और केंचुओं को जगा देता है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं. इससे पौधों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से मिलने लगते हैं. इससे फसल की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों में बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है.

घर पर कैसे करें तैयार?

जीवामृत बनाना इतना आसान है कि कोई भी किसान इसे अपने घर के कोने में तैयार कर सकता है. इसके लिए आपको बाजार से कुछ भी महंगा खरीदने की जरूरत नहीं है.

जरूरी सामान:

  • देसी गाय का गोबर: करीब 10 किलो (ताजा हो तो बेहतर).
  • गोमूत्र: 8 से 10 लीटर.
  • गुड़: 1-2 किलो (पुराना गुड़ ज्यादा असरदार होता है).
  • बेसन: 1-2 किलो (किसी भी दाल का आटा).
  • सजीव मिट्टी: मुट्ठी भर (किसी पुराने पेड़ के नीचे की या जंगल की मिट्टी, जहां केमिकल न पड़ा हो).
  • पानी: 200 लीटर.

बनाने की आसान विधि

  • सबसे पहले एक बड़े प्लास्टिक ड्रम में 200 लीटर पानी भरें.
  • अब इसमें बताई गई सभी सामग्री को डाल दें.
  • एक डंडे की मदद से इस घोल को घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में 2-3 मिनट तक अच्छे से घुमाएं.
  • इसे किसी बोरी या कपड़े से ढककर छायादार जगह पर रख दें.
  • अगले 2 से 3 दिनों तक इसे सुबह और शाम दो बार डंडे से हिलाते रहें.

बस, आपका शक्तिशाली जीवामृत तैयार है. इसे आप सीधे सिंचाई के पानी के साथ बहा सकते हैं या छानकर फसलों पर स्प्रे कर सकते हैं.

फसल के साथ जेब को भी फायदा

जीवामृत के नियमित इस्तेमाल से सबसे बड़ा बदलाव मिट्टी की बनावट में आता है. मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे वह पानी को ज्यादा देर तक सोखकर रख सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि जो किसान जीवामृत अपना रहे हैं, उनकी रासायनिक खादों पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है. यानी खाद का खर्चा जीरो और पैदावार बढ़िया. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पैदा होने वाला अनाज पूरी तरह शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक होता है, जिसकी बाजार में कीमत भी अच्छी मिलती है.

तो इस बार अपने खेत के एक छोटे से हिस्से में जीवामृत का प्रयोग करके देखें.

  • तैयार होने का समय: 48 से 72 घंटे
  • उपयोग: छिड़काव या सिंचाई के साथ
  • मुख्य लाभ: मिट्टी की उर्वरता और कम लागत
  • विशेषता: पूरी तरह प्राकृतिक और सुरक्षित

ये भी पढ़ें: खरीदारी के लिए तैयार रखें अपना कार्ड! Amazon की नई सेल में कौड़ियों के दाम मिल रहे हैं ये बड़े ब्रांड्स

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

Recent Posts

एशियन गेम्स में मेडल जिताने वाले कोच को महीनों से नहीं मिला वेतन

एशियन गेम्स में भारत को 3 गोल्ड मेडल जिताने वाले कंपाउंड आर्चरी टीम के कोच…

7 hours ago

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पीएम मोदी से की मुलाकात, राज्य में शांति बहाली और विकास कार्यों पर हुई चर्चा

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह…

8 hours ago

एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने सीएम योगी से की भेंट, शिक्षा और शोध पर हुई चर्चा

एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने सीएम योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार…

8 hours ago

लखनऊ के कैफे संचालक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, मां बोली- ‘कान से खून बह रहा था, आंखें फूटी थीं’

लखनऊ के हजरतगंज में कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला गरमा गया…

9 hours ago

उत्तरकाशी में फिर कांपी धरती, 4.2 तीव्रता के भूकंप से दहशत, घरों से बाहर निकले लोग

Uttarkashi Earthquake: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में शनिवार रात 8:07 बजे 4.2 तीव्रता का भूकंप…

9 hours ago