आज के समय में खेती-किसानी पहले जैसी आसान नहीं रही. एक तरफ आसमान से बरसती बेमौसम बारिश और जलवायु परिवर्तन की मार है, तो दूसरी तरफ मिट्टी की घटती ताकत ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है. फसल अच्छी पाने के चक्कर में हम खेतों में धड़ल्ले से रासायनिक खाद (Chemical Fertilizer) और कीटनाशक डाल रहे हैं, लेकिन इसका नतीजा क्या निकल रहा है? जमीन पथरीली होती जा रही है, खेती की लागत बढ़ रही है और जो अनाज हमारी थाली तक पहुँच रहा है, वह भी जहरीला होता जा रहा है.
ऐसे में देश के कई प्रगतिशील किसान अब एक पुराने लेकिन बेहद असरदार नुस्खे ‘जीवामृत’ की ओर लौट रहे है. जीवामृत कोई साधारण खाद नहीं है, बल्कि यह मिट्टी के लिए एक ‘संजीवनी’ की तरह काम करता है. सरल शब्दों में कहें तो यह लाभकारी सूक्ष्मजीवों (Microbes) का एक घोल है. जब हम इसे मिट्टी में डालते हैं, तो यह जमीन में सोए हुए उन मित्र कीटों और केंचुओं को जगा देता है, जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं. इससे पौधों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व प्राकृतिक रूप से मिलने लगते हैं. इससे फसल की जड़ें मजबूत होती हैं और पौधों में बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ जाती है.
जीवामृत बनाना इतना आसान है कि कोई भी किसान इसे अपने घर के कोने में तैयार कर सकता है. इसके लिए आपको बाजार से कुछ भी महंगा खरीदने की जरूरत नहीं है.
जरूरी सामान:
बनाने की आसान विधि
बस, आपका शक्तिशाली जीवामृत तैयार है. इसे आप सीधे सिंचाई के पानी के साथ बहा सकते हैं या छानकर फसलों पर स्प्रे कर सकते हैं.
जीवामृत के नियमित इस्तेमाल से सबसे बड़ा बदलाव मिट्टी की बनावट में आता है. मिट्टी भुरभुरी हो जाती है, जिससे वह पानी को ज्यादा देर तक सोखकर रख सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि जो किसान जीवामृत अपना रहे हैं, उनकी रासायनिक खादों पर निर्भरता लगभग खत्म हो गई है. यानी खाद का खर्चा जीरो और पैदावार बढ़िया. सबसे बड़ी बात यह है कि इससे पैदा होने वाला अनाज पूरी तरह शुद्ध और स्वास्थ्यवर्धक होता है, जिसकी बाजार में कीमत भी अच्छी मिलती है.
तो इस बार अपने खेत के एक छोटे से हिस्से में जीवामृत का प्रयोग करके देखें.
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-भारत एक्सप्रेस
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