ITR Filing Tips (AI IMAGE)
Income Tax Return Deadline: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख काफी नजदीक आ गई है. यदि आपने अभी तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं किया है, तो अंतिम समय की हड़बड़ाहट से बचने के लिए समय रहते प्रक्रिया पूरी कर लें. टैक्सपेयर्स की सहूलियत के लिए गुरुग्राम के पूर्व ACFO और CA ने टैक्स बचाने के 6 शानदार तरीके शेयर किए हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपना टैक्स का बोझ काफी हद तक कम कर
इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की 31 जुलाई की डेडलाइन करीब है. CA के अनुसार, ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनने वाले टैक्सपेयर्स 6 प्रमुख डिडक्शन्स के जरिए बड़ी बचत कर सकते हैं. इनमें सेक्शन 80C (₹1.5 लाख), NPS 80CCD(1B) (₹50 हजार), हेल्थ इंश्योरेंस 80D (₹1 लाख तक), एजुकेशन लोन ब्याज 80E (बिना सीमा), दान 80G (50%-100%), और होम लोन ब्याज 24(B) (₹2 लाख) शामिल हैं. इसके अलावा, रिटर्न दाखिल करने से पहले Form 16, AIS और Form 26AS का मिलान करने और ई-वेरिफिकेशन (e-verification) पूरा करने की सलाह दी गई है.
ओल्ड टैक्स रिजीम अपनाने वाले टैक्सपेयर्स के लिए सेक्शन 80C टैक्स बचत का सबसे लोकप्रिय जरिया है. PPF, EPF, ELSS, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना, LIC प्रीमियम, ट्यूशन फीस और होम लोन के प्रिंसिपल अमाउंट पर 80C के तहत ₹1.5 लाख तक का डिडक्शन मिलता है. वहीं, अगर आप नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करते हैं, तो सेक्शन 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त छूट मिलती है. यानी दोनों मिलाकर कुल ₹2 लाख तक की आय टैक्स-फ्री हो सकती है.
अगर आपने अपने या परिवार के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लिया है, तो सेक्शन 80D में ₹25,000 से लेकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹1 लाख तक का क्लेम किया जा सकता है (शर्त यह है कि भुगतान डिजिटल या बैंकिंग माध्यम से हो). इसके अलावा, उच्च शिक्षा के लिए लिए गए लोन के ब्याज पर सेक्शन 80E के तहत बिना किसी ऊपरी सीमा के छूट मिलती है. वहीं, सेक्शन 24(B) के तहत होम लोन के ब्याज पर भी ₹2 लाख तक का टैक्स डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है.
अगर आपने सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी संस्था, ट्रस्ट या राहत कोष में दान दिया है, तो सेक्शन 80G के तहत 50% से 100% तक टैक्स छूट पाने का विकल्प उपलब्ध है. हालांकि, इसका क्लेम करने के लिए दान की रसीद और संबंधित संस्था का 80G रजिस्ट्रेशन विवरण सुरक्षित रखना अनिवार्य है.
CA का कहना है कि रिटर्न दाखिल करने से पहले फॉर्म 16, एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS का सही तरीके से मिलान जरूर कर लें. इससे आपकी आय और टैक्स कटौती में किसी भी तरह का अंतर नहीं रहेगा. साथ ही, सही टैक्स रिजीम चुनें और ITR सबमिट करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना न भूलें, क्योंकि इसके बिना आपकी रिटर्न फाइलिंग अधूरी मानी जाएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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