UP News: प्रदेश में राजनेताओं और ऑफिसर के बीच टकराव हो रहा है. फाइल में अब तक होने वाला टकराव अब सड़क पर दिख रहा है और ये प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बन रहा है. ऊर्जा मंत्री एके शर्मा (AK Sharma) का सुदर्शन चक्र चलाने जैसे बयान बिगड़ी व्यवस्था की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है.
एक अन्य मामले में कानपुर देहात में राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला (Pratibha Shukla) और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला (Anil Shukla) पुलिस के खिलाफ धरने पर बैठे चुके हैं. प्रदेश की राजनीति में अफसर और राजनेता लगातार आमने-सामने आ रहे हैं. ताजा प्रकरण में ऊर्जा विभाग में लापरवाही पर ऊर्जा मंत्री एके शर्मा लगातार नाराज चल रहे हैं, बिजली की किल्लत और आवाजाही का दोष जहां लोग उन पर मारकर हल्ला बोल रहे हैं वही उपखंड स्तर पर जनता की सुनवाई नहीं हो रही है.
ऊर्जा मंत्री के तीखे तेवरों के बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने खुद बृहस्पतिवार को ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक की. उन्होंने कहा कि
“जब पैसे और बिजली की कमी नहीं है तो लोगों को क्यों दिक्कतों का सामना कर रहा पड़ रहा है, उन्होने कहा स्थिति में सुधार न हुआ तो अफसर पर कार्रवाई होगी. मुख्यमंत्री जानते हैं कि बिजली की आपूर्ति केवल तकनीकी मामला नहीं है बल्कि प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन सकता है.”
सूत्रों का कहना है ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और पावर कारपोरेशन के बड़े अफसर के बीच सब कुछ ठीक नहीं है. इसी प्रकार कानपुर देहात में राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला और सांसद देवेंद्र सिंह भोले के बीच टकराव चरम पर है . सड़क बनवाने को लेकर ये विवाद सड़क पर आ गया है. राज्य मंत्री अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गई. उनके धरने के बाद भी करवाई नहीं हुई है. इससे वो नाराज चल रही हैं.
ज्ञात हो इससे पहले भी स्टांप एवं कर पंजीयन विभाग में मंत्री रविंद्र जायसवाल को विश्वास में लिए बगैर बड़े पैमाने पर तबादले कर दिए गए थे. एक अफसर ने पूरा खेल करते हुए बाबू तक को डेप्युटी रजिस्टार बना डाला था. मंत्री ने खुलकर आरोप लगाया था की अफसर ने पैसे लेकर तबादला किए. मामला मुख्यमंत्री की जानकारी में पहुंचा तो न केवल तबादले निरस्त हुए बल्कि अवसर पर भी कार्रवाई हुई.
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डिप्टी सीएम बृजेश पाठक (Dy CM Brijesh Pathak) के विभाग में भी ऑफिसर अपनी मनमानी करने से नहीं चूक रहे हैं. डिप्टी सीएम के अनुमति के बगैर तबादले किए गए तो उनका पारा चढ़ गया. उन्होंने पत्रावली को मुख्यमंत्री को भेज दिया. पहली बार इस तकरार का असर तबादला सत्र पर हुआ. इसी प्रकार प्रदेश के कई जनपदों में अक्सर और नेताओं के बीच टकराव के चर्चे आम है.
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-भारत एक्सप्रेस
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