दुनिया के कई देशों में पुरुषों की तुलना में कम महिलाएं जेल भेजी जाती हैं. इसके बावजूद हाल के वर्षों में महिला कैदियों की संख्या तेज़ी से बढ़ी है. गार्जियन की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक स्तर पर महिला कैदियों का आंकड़ा लगातार ऊपर जा रहा है और कई देशों में यह गंभीर सामाजिक और आर्थिक समस्याओं की ओर इशारा करता है.
अपराध और न्याय नीति अनुसंधान संस्थान के अनुसार, दुनिया भर में 7,33,000 से अधिक महिलाएं और लड़कियां जेलों में बंद हैं. इनमें से कई विचाराधीन कैदी हैं, कईयों का मुकदमा चल रहा है और कुछ को सज़ा सुनाई जा चुकी है. संस्थान का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे भी अधिक हो सकती है क्योंकि पांच देशों के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं और चीन के आंकड़े भी पूरी तरह पुष्टि नहीं किए गए हैं.
कैदियों की कुल संख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी हमेशा कम रही है. आमतौर पर यह 2% से 9% के बीच रहती है. लेकिन 2024 में वैश्विक आंकड़ा बढ़कर 6.8% तक पहुंच गया. 2000 से अब तक महिला कैदियों की संख्या में लगभग 60% की वृद्धि हुई है, जबकि पुरुष कैदियों में यह बढ़ोतरी केवल 22% है. यानी महिलाओं की जेल आबादी लगभग तीन गुना तेजी से बढ़ी है. 2010 से 2020 के बीच भी महिलाओं की संख्या में 1 लाख से अधिक का इजाफा हुआ.
दुनिया में सबसे अधिक महिला कैदी अमेरिका में हैं, जिनकी संख्या 1,74,607 है. इसके बाद चीन का स्थान आता है, जहां करीब 1,45,000 महिलाएं और लड़कियां जेल में हैं. इसके अलावा प्रशासनिक और मुकदमे से पहले की हिरासत में भी अनगिनत महिलाएं हैं जिनके पक्के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं.
ब्राजील में 50,441, रूस में 39,153, थाईलैंड में 33,057 और भारत में 23,772 महिलाएं जेल में हैं. फिलीपींस, तुर्की, वियतनाम, मैक्सिको और इंडोनेशिया में भी महिला कैदियों की संख्या हजारों में है. इंग्लैंड और वेल्स में 3,566 महिलाएं कैद हैं और यह संख्या 2027 तक बढ़कर 4,200 हो सकती है. यूरोप में कुल 94,472 महिलाएं जेलों में हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया में यह संख्या 3,473 है.
रिपोर्ट बताती है कि ज्यादातर महिलाएं गैर-हिंसक अपराधों के लिए जेल जाती हैं. कई अपराध सीधे तौर पर गरीबी से जुड़े होते हैं. जीविका चलाने, बच्चों की देखभाल या परिवार को संभालने के लिए महिलाएं तस्करी, छोटे पैमाने की चोरी या देह व्यापार जैसे अपराधों में फंस जाती हैं.
पेनल रिफॉर्म इंटरनेशनल और अन्य संस्थाओं के शोध में पाया गया कि कुछ देशों में गर्भपात, व्यभिचार, यौन दुराचार और वेश्यावृत्ति जैसे मामलों को अपराध माना जाता है, जिनका असर मुख्य रूप से महिलाओं पर पड़ता है. इसके अलावा जमानत या जुर्माना भरने में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाएं असमर्थ होती हैं, जिसके कारण उन्हें जेल भेज दिया जाता है.
स्पष्ट है कि दुनियाभर में महिला कैदियों की बढ़ती संख्या केवल अपराध का मुद्दा नहीं है. इसके पीछे गरीबी, सामाजिक दबाव और कानूनी असमानताएं भी बड़ी वजह हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि महिला कैदियों को लेकर अधिक मानवीय और सामाजिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है.
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-भारत एक्सप्रेस
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