Iran attack on us bases in Bahrain
Iran attack on us bases: मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. अमेरिका की ओर से बुधवार को किए गए दो बड़े हवाई हमलों के बाद ईरान ने जोरदार जवाबी कार्रवाई का दावा किया है. तेहरान का कहना है कि उसने गुरुवार (16 जुलाई) को बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए अब तक का सबसे बड़ा हमला किया. इस दावे के बाद पूरे क्षेत्र में हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं.
ईरान के सरकारी मीडिया और सैन्य अधिकारियों के बयानों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच टकराव अब और तेज हो सकता है. ईरान के शक्तिशाली सैन्य संगठन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिका को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि वह इस संघर्ष को अपनी शर्तों पर लंबा नहीं खींच सकता.
IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहेबी ने कहा कि ईरान की मौजूदा सैन्य कार्रवाई का मकसद खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ढांचे और ठिकानों को निशाना बनाना है. उनका कहना था कि जब तक यह अभियान पूरा नहीं हो जाता, कार्रवाई जारी रहेगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इसके बाद ईरान अगला और अधिक विनाशकारी चरण शुरू कर सकता है. इस बयान को अमेरिका के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है. ईरान का कहना है कि वह किसी भी दबाव में पीछे हटने वाला नहीं है और अपनी रणनीति के अनुसार आगे बढ़ेगा.
इसी बीच ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक होर्मुज जलसंधि को लेकर भी अपना रुख और कड़ा कर दिया है. ईरानी थल सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अकरमी निया ने कहा कि जब तक अमेरिका ईरान की तीन प्रमुख शर्तें स्वीकार नहीं करता, तब तक इस जलमार्ग को दोबारा नहीं खोला जाएगा.
ईरान की शर्तों में दोनों देशों के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का पालन, अमेरिका की ओर से सभी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को रोकना और ईरानी कानूनों का सम्मान करना शामिल है. ईरान का कहना है कि इन शर्तों को पूरा किए बिना किसी भी जहाज को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
ये भी पढ़ें: जापान को मिला समुद्र का खजाना! टोक्यो से 360 KM दूर मिला सबसे बड़ा गोल्ड रिजर्व
बहरीन में हमले के दावे और होर्मुज जलसंधि को लेकर ईरान के कड़े रुख ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ा दी है. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है.
विशेष रूप से होर्मुज जलसंधि दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. ऐसे में यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है, तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि दोनों देशों के बीच बढ़ता टकराव क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है.
-भारत एक्सप्रेस
Pinki Roy Asian Games 2026 Gold: एशियन गेम्स 2026 में महिला कबड्डी टीम ने ईरान…
भाजपा एमएलसी शीला पंडित ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की नेता एवं सांसद मीसा भारती…
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की शनिवार को हुगली…
Samastipur Girl Misbehavior: बिहार के समस्तीपुर में लड़की से बदसलूकी और मारपीट का कथित वीडियो…
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश…
Bihar Jamui Case: किसी यौन अपराध की पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानून की नजर…