ईरान ने इज़राइल पर किया ताबड़तोड़ हमला, दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे
अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों के कुछ ही घंटे के भीतर ही ईरान ने इजरायल के खिलाफ बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया है. ईरान ने अपना ‘Operation True Promise-3’ तेज करते हुए इजरायल पर दर्जनों मिसाइलें दागी हैं. इसके अलावा उसने बहुत-से ड्रोन भी भेजे हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, रविवार तड़के अमेरिकी हमले में ईरान के 3 प्रमुख परमाणु ठिकाने तबाह हो गए. वहीं, इजरायल ने भी ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए. इससे ईरान बौखला गया और उसने इजरायल पर लगभग 30 बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन दागे. मिसाइल हमलों में Tel Aviv, Haifa और अन्य सामरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया. इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश हमलों को नाकाम किया, लेकिन कुछ मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचीं, जिससे नुकसान हुआ.
ईरानी डिफेंस ऑफिशियल्स का कहना है कि यह हमला अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों का जवाब था. इस कार्रवाई से मध्य पूर्व में क्षेत्रीय युद्ध की आशंका और गहराई है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तत्काल संयम की अपील की है.
“ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3” के जरिए दागे आत्मघाती ड्रोन
इससे पहले बीती रात ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3” (Operation True Promise 3) के तहत इजरायल के तेल अवीव, हाइफ़ा, अशदूद और अशकेलॉन जैसे प्रमुख शहरों पर दर्जनों क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ ‘शहीद’ श्रेणी के आत्मघाती ड्रोन से हमला किया. ईरानी मीडिया ने इसे “शहीद वैज्ञानिकों का बदला” बताया और कहा कि यह कार्रवाई ईरान की संप्रभुता और परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की प्रतिक्रिया है.
इजरायल के विभिन्न रिहायशी इलाकों में विस्फोट हुए
इजरायल की एयर डिफेंस प्रणाली ‘आयरन डोम’ और डेविड स्लिंग ने कुछ मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया, लेकिन कई मिसाइलें लक्ष्य तक पहुंचीं और विभिन्न रिहायशी इलाकों में विस्फोट हुए. इजरायली अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में अब तक 24 लोगों की मौत और 70 से अधिक नागरिक घायल हुए हैं. कई इमारतों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिसमें अस्पताल और स्कूल भी शामिल हैं. इजरायल में पूरे देश में रेड अलर्ट घोषित कर दिया गया है और नागरिकों को बंकरों में रहने की सलाह दी गई है.
अमेरिका और इजरायल के रक्षा प्रतिष्ठाने निशाने पर
ईरान ने इस हमले में तकनीकी रूप से उन्नत हथियारों का इस्तेमाल किया, जिनमें फातेह-110, ज़ुल्फ़िकार शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें, सौमार क्रूज़ मिसाइल और शहीद-136 ड्रोन शामिल हैं. इस हमले को एक सुसंगठित और सुनियोजित जवाबी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है, जिसका लक्ष्य इजरायल के सामरिक ठिकानों और मनोबल को कमजोर करना था. अमेरिका और इजरायल के रक्षा प्रतिष्ठानों ने प्रतिक्रिया में जवाबी हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया है, जिससे संघर्ष और भड़क सकता है.
बढ़ते युद्ध को लेकर संयुक्त राष्ट्र, EU ने चिंता जताई
संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अन्य वैश्विक शक्तियों ने इस बढ़ते युद्ध को लेकर गंभीर चिंता जताई है. भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों को इजरायल और ईरान की यात्रा न करने की सलाह दी है. क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष अब केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरी मध्य पूर्व को युद्ध के मुहाने पर ले आया है. यह न केवल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरे में डाल रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय शांति व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन चुका है.
(Edited By Vijay Ram)
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