अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (फाइल फोटो)
America Strikes In Iran: पश्चिमी एशिया में छिड़ी ईरान-इजरायल की जंग में आज अमेरिका सीधे कूद पड़ा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के आदेश पर अमेरिकी वायुसेना ने ईरान में जाकर वहां 3 परमाणु ठिकानों पर बमबारी की. सुबह-सबरे ही हमला करके, अमेरिकी लड़ाकू विमान सुरक्षित वापस भी चले गए.
इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि हमारा मकसद ‘ईरान को परमाणु बम बनाने से रोकना और दुनिया में परमाणु खतरे से बचाना’ था. आज रात मैं दुनिया को बता सकता हूं कि यह हमला एक शानदार सैन्य सफलता थी.
— Donald J. Trump (@realDonaldTrump) June 22, 2025
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी हमला सुबह 4:30 बजे (भारतीय समयानुसार) शुरू हुआ. ट्रम्प ने दावा किया कि फोर्डो पर बमों की पूरी खेप गिराई गई, और उसके बाद सभी विमान सुरक्षित रूप से ईरान के हवाई क्षेत्र से बाहर आ गए.
ईरान पर हमले के बाद ट्रम्प ने अभी दो टूक कहा है, कि ‘अभी कई टारगेट्स बाकी, अगर शांति नहीं हुई तो हम फिर मारेंगे…’ दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति ने दावा किया कि परमाणु कार्यक्रम उनका अधिकार है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे ईरान के इस अधिकार का सम्मान करें.
"ANY RETALIATION BY IRAN AGAINST THE UNITED STATES OF AMERICA WILL BE MET WITH FORCE FAR GREATER THAN WHAT WAS WITNESSED TONIGHT. THANK YOU! DONALD J. TRUMP, PRESIDENT OF THE UNITED STATES" pic.twitter.com/vhTb5uNuCB
— The White House (@WhiteHouse) June 22, 2025
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित था अमेरिका
गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जता रहे हैं, जिसे वे एक संभावित खतरे के रूप में देखते हैं. अमेरिका का ईरान पर हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर है, और इजरायल पहले से ही ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रहा था.

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का ईरान पर हमला होना क्षेत्र में और अस्थिरता पैदा कर सकता है, क्योंकि ईरान जवाबी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं कर रहा.
अमेरिकी हमले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिकी हमले की खबर के बाद विश्व समुदाय में चिंता बढ़ गई है. कुछ देशों ने इस कार्रवाई की निंदा की, जबकि अमेरिकी सहयोगी देशों ने इसे इजरायल के समर्थन के रूप में देखा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल किया गया, जो ईरान के गहरे बंकरों को नष्ट करने में सक्षम हैं.

इजरायल ने अमेरिका को दिया धन्यवाद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच हाल के दिनों में कई दौर की बातचीत हुई, जिसमें इस हमले की योजना बनाई गई. विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को यह हमला काफी नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन इससे लंबे समय तक शांति स्थापित होना मुश्किल होगा.
यह हमला न केवल ईरान-इजरायल संघर्ष को नई दिशा देगा, बल्कि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा. ट्रम्प का अपने देश को संबोधन इस बात का संकेत हो सकता है कि अमेरिका आगे की रणनीति क्या अपनाएगा. वहीं, ईरान के जवाबी कदम और अंतरराष्ट्रीय दबाव इस स्थिति को और जटिल बना सकते हैं.
यह भी पढ़िए: ईरान-इजराइल जंग में कूदा अमेरिका, 3 परमाणु ठिकानों पर गिराए बम, ट्रम्प ने हमले की पुष्टि की
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


