पाकिस्तान में अब भी सुरक्षित है हजारों साल पुराना ये हनुमान मंदिर.
Panchmukhi Hanuman Karachi Pakistan: आज भारत में कई स्थानों पर जब ‘बड़ा मंगल’ (बुढ़वा मंगल) मनाया जा रहा है, तब हमारे पश्चिमी पड़ोसी यानी पाकिस्तान के कराची से भी भक्ति की अनूठी तस्वीर सामने आई है. कराची स्थित ‘श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर’ केवल हिंदुओं की आस्था के लिए ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक संरक्षण के कारण भी चर्चा में है. यह मंदिर लगभग 1500 साल पुराना है, जो अभी सुरक्षित है. ये हैरत की बात है क्योंकि पाकिस्तान में मंदिरों की संख्या घटकर काफी कम रह गई है.
कराची के ‘सोल्जर बाजार’ इलाके में स्थित इस मंदिर की बड़ी विशेषता यहाँ स्थापित हनुमानजी की प्राचीन मूर्ति है. पौराणिक मान्यता है कि यह मूर्ति किसी कलाकार द्वारा तराशी नहीं गई है, बल्कि यह ‘स्वयंभू’ प्रतिमा है. यानी यह जमीन से खुद-ब-खुद प्रकट हुई थी. पंचमुखी स्वरूप वाली यह मूर्ति प्राकृतिक नीले और सफेद रंग के पत्थर की है. भक्तों का मानना है कि इस मंदिर की 11 परिक्रमा करने से हर बिगड़ा काम बन जाता है.
कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, इस मंदिर का अस्तित्व त्रेतायुग से है. यहां भगवान श्री राम के चरण पड़े थे. बीते हजारों सालों में यहां कई मंदिर टूटे और फिर से बने. मौजूदा मंदिर का र्निर्माण 1882 में करवाया गया था, लेकिन मुख्य मूर्ति (विग्रह) हजारों साल पुरानी है. यह मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल माना जाता है, जहाँ कई बार स्थानीय मुस्लिम भी मंदिर की सुरक्षा और उत्सवों में सहयोग करती है.
कुछ साल पहले जब इस मंदिर के परिसर में जीर्णोद्धार के लिए खुदाई की गई थी, तब वहाँ से हिंदू देवी-देवताओं की कई अन्य प्राचीन मूर्तियां और नक्काशीदार पत्थर मिले थे. भारतीय पुरातत्व विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह स्थल दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण हिंदू धरोहरों में से एक है. पाकिस्तान सरकार ने भी इसे राष्ट्रीय विरासत घोषित करने की प्रक्रिया में शामिल किया है, ताकि इस ऐतिहासिक संरचना को बचाया जा सके.
भले ही सरहदें अलग हों, लेकिन भक्तों की आस्था एक जैसी है. बड़ा मंगल के अवसर पर यहाँ विशेष भंडारे और पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है. कराची में रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के साथ-साथ कई सिंधी परिवार यहाँ अपनी मन्नतें लेकर आते हैं. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि विभाजन के कठिन समय में भी इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुँचा था, जो अपने आप में एक चमत्कार माना जाता है. यह मंदिर हमें याद दिलाता है कि आस्था और संस्कृति की जड़ें भूगोल की सीमाओं से कहीं अधिक गहरी होती हैं. आज के समय में यह मंदिर दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव की एक अहम कड़ी बना हुआ है.
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