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क्या आपने इस मंदिर में किए हैं दर्शन? यहां सदियों से हवा में लटका है स्तंभ, रहस्य जानने दुनिया भर से आते हैं श्रद्धालु

Unique Temple: आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले का लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर अपने रहस्यों के लिए विश्वविख्यात है. 16वीं शताब्दी में बना यह प्राचीन मंदिर भगवान शिव के रौद्र अवतार वीरभद्र को समर्पित है. यहां का सबसे बड़ा आकर्षण हवा में लटकता खंभा है, जो आज तक रहस्य बना हुआ है.

veerabhadra temple lepakshi hanging pillar

Lepakshi Temple Mystery: इतिहास, वास्तुकला और आध्यात्मिकता का अनोखा संगम है भारत का यह मंदिर (Temple). यह प्राचीन मंदिर 16वीं शताब्दी में बना था. इसमें 70 खम्भे हैं, जिनमें एक स्तंभ ऐसा है जो जमीन में नहीं धंसा, बल्कि हवा में लटका हुआ है. उसका वजन सैकड़ों किलो होगा, लेकिन पता नहीं क्यों, सदियों से वह न तो गिरा और ना ही चटका.

यह मंदिर भगवान शिव (Lord Shiva) के रौद्र अवतार वीरभद्र को समर्पित है. विजयनगर साम्राज्य की अद्भुत कला और शिल्प का यह उत्कृष्ट उदाहरण पहाड़ की चट्टानों को काटकर बनाया गया है. इस मंदिर (Temple) की दीवारों और खंभों पर की गई नक्काशी इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती है. यहां का सबसे बड़ा आकर्षण है हवा में लटकता खंभा, जो आज तक रहस्य बना हुआ है.

वीरभद्र(भगवान शिव के रौद्र रूप) और भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपने सुंदर मूर्तियां, नक्काशीदार स्तंभ और अद्भुत चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता है, शिवलिंग अपने आप प्रकट हुई है. एक ही पत्थर से तराशी गई विशाल नंदी प्रतिमा भारत की सबसे बड़ी नंदी प्रतिमाओं में गिनी जाती है.

भारत अपने प्राचीन मंदिरों और अद्भुत शिल्पकारी के लिए विश्न प्रसिद्ध है. आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. सुंदर नक्काशी के साथ-साथ यह मंदिर अपने रहस्यमयी हवा में लटके खंभे के कारण सबसे खास है.

मंदिर का र्निमाण16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के दौरान हुआ था. धारणा है कि विरुपन्ना नाम के अधिकारी और उनके भाई ने इसकी रचना की थी. कुछ मान्यताओं के मुताबिक ऋषि अगस्त्य ने भी इसके र्निमाण में योगदान दिया था. यह मंदिर विजयनगर कला का सुंदर उदाहरण है.

इस मंदिर के 70 खंभों में से एक खंभा जमीन को नहीं छूता है. इस खंभे के नीचे से कपड़ा या कागज आसानी से निकाला जा सकता है. मान्यता है इसको छूने से फल मिलता है. इसका रहस्य आज भी अनसुलझा है.

यह मंदिर आस्था और विज्ञान दोनों को चुनौती देता है. माना जाता है कि मंदिर का सारा भार इसी खंभे पर है. इसके बावजूद यह जमीन से जुड़ा नहीं है. ब्रिटिश इंजीनियर भी इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण नहीं ढूंढ पाए और रहस्य आज भी बरकरार है.

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