Su-57 Stealth Fighter Jet: मित्र-राष्ट्र रूस ने अपने 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर Su-57 को भारत को बेचने का ऑफर दिया है. दुबई एयर शो 2025 के दौरान रूसी कंपनी रॉस्टेक के सीईओ सेर्गेई केमेजोव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि भारत जैसे देश को रूस न केवल ये घातक विमान उपलब्ध कराएगा, बल्कि पूरी तकनीक भी बिना किसी शर्त के ट्रांसफर करने को राजी है. यदि दोनों देशों में इस पर डील होती है तो यह प्रस्ताव भारत-रूस रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई दे सकता है.
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की मॉस्को यात्रा और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर 2025 में होने वाली भारत यात्रा के बाद 2025 के भारत-रूस शिखर सम्मेलन में यह सौदा घोषित हो सकता है.
लंबे समय से चली आ रही चर्चाओं के बाद, यह ऑफर भारत की वायुसेना (IAF) के लिए एक बड़ा अवसर है, खासकर जब अमेरिका F-35 को बेचने की कोशिश कर रहा है. रूस का दावा है कि Su-57 अमेरिकी F-35 का सीधा प्रतिद्वंद्वी है, यदि भारत के दुश्मनों के पास F-35 भी हो तो भारत Su-57 के बेड़े से दुश्मन को धूल चटा सकता है.
Su-57 फाइटर जेट, जिसे रूस में ‘फेलन’ के नाम से जाना जाता है, दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में शुमार है. इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टील्थ तकनीक है, जो रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को महज 0.1 वर्ग मीटर तक सीमित रखती है. यानी दुश्मन रडार पर यह छोटे पक्षी जैसा दिखता है, जिससे इसे आसानी से चुपके से हमला करने का मौका मिलता है. विमान में आंतरिक हथियार बे और रडार-अवशोषक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे लगभग अदृश्य बनाता है.
सुपरक्रूज क्षमता इसे बिना आफ्टरबर्नर के मैक 1.3-1.6 की रफ्तार देने की ताकत देती है, जिससे ईंधन की बचत होती है और लंबी दूरी की उड़ानें संभव हो जाती हैं. अधिकतम गति 2,450 किमी/घंटा (मैक 2+) है, जबकि कॉम्बैट रेंज 1,900-2,000 किमी और फेरी रेंज 7,800 किमी (रिफ्यूलिंग के साथ). दो AL-41F1 इंजन (अपग्रेड AL-51F1) प्रत्येक 147-180 kN थ्रस्ट प्रदान करते हैं.
सुपरमैन्यूवरेबिलिटी इसकी जान है – थ्रस्ट वेक्टरिंग तकनीक से 3D मैन्यूवरिंग संभव है, जो हवाई युद्ध में दुश्मन को पछाड़ने में मदद करती है. N036 Byelka AESA रडार 360-डिग्री कवरेज देता है, जबकि AI-असिस्टेड सेंसर फ्यूजन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम युद्धक्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं.
हथियारों की बात करें तो 10 टन पेलोड के साथ R-37M एयर-टू-एयर मिसाइल (लंबी दूरी), Kh-69 क्रूज मिसाइल, एंटी-शिप हथियार और यहां तक कि न्यूक्लियर कैपेबल ऑप्शन शामिल हैं.
यह मल्टी-रोल विमान है- हवाई लड़ाई, ग्राउंड स्ट्राइक और समुद्री हमलों के लिए उपयुक्त. S-70 Okhotnik ड्रोन के साथ ‘लॉयल विंगमैन’ मोड में यह मानवरहित सहयोगी के रूप में काम कर सकता है. डिजाइन में लंबाई 20.1 मीटर, विंगस्पैन 14 मीटर और अधिकतम टेकऑफ वेट 35,000 किग्रा है.
एक्सप्लोजन-प्रूफ फ्यूल सिस्टम और इनेर्ट गैस फायर सप्रेशन से पायलट की सुरक्षा सुनिश्चित होती है. यूक्रेन संघर्ष में परखा जा चुका यह विमान इसलिए भी घातक है, क्योंकि यह दुश्मन को पहचानने, चकमा देने और हमला करने में बाजी मार लेता है.
डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जबकि लक्ष्य 42 का है. चीन का J-20 स्टेल्थ फ्लीट और पाकिस्तान की बढ़ती हवाई ताकत LAC और LoC पर खतरा बनी हुई है. ऐसे में Su-57 इनसे निपटने में सक्षम होगा, खासकर हिमालयी इलाकों में जहां स्टेल्थ और लंबी रेंज जरूरी है. यह F-35 का सस्ता विकल्प (प्रति जेट 50 मिलियन डॉलर) है, लेकिन तकनीक ट्रांसफर से भारत विदेशी निर्भरता से मुक्त हो सकेगा.
भारतीय वायुसेना के पिछले अनुभव जैसे Mirage-2000 अपग्रेड पर 9,746 करोड़ का खर्च बच सकता है. रूस ने इंजन, रडार और स्टेल्थ तकनीक शेयर करने का वादा किया है, जो चीन को भी नहीं मिली. इससे HAL नासिक में उत्पादन संभव होगा, ‘मेक इन इंडिया’ को बल मिलेगा, रोजगार सृजित होंगे.
एक्सपर्ट्स की मानें तो 2007 के FGFA प्रोजेक्ट से हमारा जुड़ाव (2018 में भारत बाहर हुआ था) अब बहाल हो रहा है. 2-3 स्क्वाड्रन (36-54 जेट) मिलने से IAF की ताकत दोगुनी हो जाएगी. स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट (प्रोटोटाइप 2-3 साल में) को भी सपोर्ट मिलेगा. अमेरिकी CAATSA प्रतिबंधों के बीच रूस का यह ऑफर भारत की रक्षा रणनीति को मजबूत करेगा, क्षेत्रीय संतुलन बदलेगा.
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