AI Image
Iran UAE Conflict: अमेरिका और इजरायल की ओर से 28 फरवरी को ईरान पर हमले शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया. इसी बीच यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायेद ( Mohamed bin Zayed Al Nahyan) ने कई खाड़ी देशों के नेताओं से फोन पर बातचीत की. उन्होंने खास तौर पर मोहम्मद बिन सलमान (MBS)से मुलाकात कर ईरान के खिलाफ साझा जवाबी रणनीति बनाने की अपील की. हालांकि, यूएई की कोशिशों के बावजूद ज्यादातर खाड़ी देशों ने सीधे सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाए रखी. यह दावा ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई का मानना था कि अगर खाड़ी देश एकजुट होकर जवाब दें, तो ईरान पर दबाव बढ़ेगा और वह आगे हमले करने से बचेगा. उस दौरान ईरान ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई के जवाब में खाड़ी देशों की ओर सैकड़ों ड्रोन और मिसाइल दागे थे. इन हमलों में बंदरगाह, एयरपोर्ट, होटल और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया. वहीं, होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल और गैस सप्लाई प्रभावित हुई और खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा.
यूएई का कहना था कि यह सिर्फ किसी एक देश का मामला नहीं, बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. उसने खाड़ी नेताओं को यह भी याद दिलाया कि 1981 में बने गल्फ कॉपरेशन काउंसिल (GCC) का गठन भी क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और ईरान से जुड़े खतरे को देखते हुए किया गया था.
लेकिन सऊदी अरब का रुख इससे अलग रहा. सऊदी नेतृत्व नहीं चाहता था कि हालात और ज्यादा बिगड़ें, इसलिए उसने सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय सुरक्षा और बचाव उपायों पर जोर दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब को डर था कि यूएई का आक्रामक रुख तनाव को और बढ़ा सकता है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मार्च और अप्रैल के दौरान यूएई ने अकेले ही ईरान पर कुछ सीमित हमले किए. इसके बाद यूएई और सऊदी अरब के बीच तनाव और बढ़ गया. दोनों देशों के बीच पहले से ही यमन और सूडान जैसे मुद्दों को लेकर मतभेद मौजूद थे.
तनाव बढ़ने के बीच यूएई ने बड़ा कदम उठाते हुए OPEC छोड़ने का ऐलान कर दिया. माना जा रहा है कि ईरान युद्ध और खाड़ी देशों के बीच बढ़ते मतभेद इसके पीछे बड़ी वजह रहे.
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के दौरान यूएई सबसे ज्यादा निशाने पर रहा और ईरान ने उस पर करीब 3,000 ड्रोन और मिसाइल दागे. हालांकि, ज्यादातर हमलों को एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया. हाल ही में ईरान ने यूएई के फुजैराह तेल बंदरगाह पर भी हमला किया था.
इस दौरान यूएई और इजरायल ने खुफिया जानकारी साझा करते हुए मिलकर काम किया. मिसाइल हमलों को रोकने के लिए इजरायल ने यूएई को आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम और सैनिक सहायता भी उपलब्ध कराई.
दूसरी ओर, कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान ने सीधे युद्ध में शामिल होने से बचने की कोशिश की. कतर ने अपने गैस प्लांट पर हमले के बाद जवाबी कार्रवाई पर विचार जरूर किया, लेकिन बाद में तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए.
ये भी पढ़ें- अगला हफ्ता ईरान पर पड़ेगा सबसे भारी! क्या है पेंटागन का ‘महाविनाश’ ब्लूप्रिंट? डोनाल्ड ट्रंप की हरी झंडी का इंतजार
रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन चाहता था कि सऊदी अरब और कतर भी ईरान के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई में शामिल हों. लेकिन इन देशों को आशंका थी कि ऐसा होने पर ईरान उनके यहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है. इसी वजह से उन्होंने सीधे युद्ध से दूरी बनाए रखना बेहतर समझा.
-भारत एक्सप्रेस
Ghaziabad Police Encounter: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित विजयनगर इलाके में पुलिस और बदमाशों के…
मौसम विभाग (IMD) ने 18 अक्टूबर को देश के कई राज्यों में भारी बारिश, आंधी…
France Protests: फ्रांस में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ हुए देशव्यापी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप…
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास नवरात्र के दौरान बेकाबू ट्रक…
आज 18 अक्टूबर 2026, रविवार को शारदीय नवरात्र की महाष्टमी का पावन अवसर है. तिथि,…
18 अक्टूबर 2026 को महाष्टमी के दिन सुकर्मा योग के प्रभाव से मेष, सिंह, मकर…