Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अस्थायी आदेश, असली फैसला अभी बाकी

क्या भोजशाला विवाद का अंत करीब है? सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज की अस्थायी अनुमति दी, जबकि हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार बरकरार रखा.

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम आदेश दिया है. अदालत ने कहा है कि मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक पास के खुले स्थान पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाएगी. साथ ही, हिंदू पक्ष को भी अपने धार्मिक कार्यों में किसी तरह की बाधा नहीं दी जाएगी.

अस्थायी व्यवस्था लागू

शीर्ष अदालत ने साफ किया कि यह व्यवस्था फिलहाल अस्थायी है और अंतिम निर्णय अपील की सुनवाई पूरी होने के बाद ही तय होगा. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए उपयुक्त जगह उपलब्ध कराए.

एएसआई पर रोक

सुनवाई के दौरान अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी आदेश दिया कि वह बिना अदालत को जानकारी दिए परिसर में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा. इस पर नोटिस जारी कर दिया गया है और अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद होगी.

सीजेआई ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत ऐसा कोई आदेश नहीं देना चाहती जिससे तनाव बढ़े. दोनों पक्षों को धैर्य रखने की सलाह दी गई. सीजेआई ने कहा कि यह अत्यंत संवेदनशील मामला है और हर शब्द सोच-समझकर इस्तेमाल करना होगा.

मुस्लिम पक्ष की दलील

मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि 1947 से लेकर अब तक यथास्थिति बनी हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने का पर्याप्त समय नहीं दिया. अहमदी ने कहा कि 2003 के एएसआई आदेश में शुक्रवार को नमाज और मंगलवार को पूजा की अनुमति थी, लेकिन अब मुस्लिम समुदाय को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है.

सिंघवी का पक्ष

वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी मुस्लिम पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि 700 सालों से यहां नमाज पढ़ी जा रही है. उन्होंने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि 1927-28 के सर्वे में इसे मस्जिद बताया गया था और वक्फ एक्ट में भी यही दर्ज है. सिंघवी ने कहा कि 2003 से अब तक शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक नमाज और मंगलवार को हिंदू पूजा होती रही है. यह सांप्रदायिक सद्भाव का उदाहरण है और इसे जारी रहना चाहिए.

हाई कोर्ट का फैसला

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि भोजशाला मूल रूप से मां सरस्वती का मंदिर था और राजा भोज के समय यह गुरुकुल के रूप में इस्तेमाल होता था. कोर्ट ने एएसआई की रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर कहा कि हिंदू समुदाय नियमित रूप से पूजा कर सकता है. वहीं, मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए वैकल्पिक भूमि देने की बात कही गई थी.

विवाद की जड़

भोजशाला परिसर को लेकर वर्षों से विवाद है. हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता है. 2003 में एएसआई ने आदेश दिया था कि मंगलवार को हिंदू पूजा करेंगे और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज पढ़ेंगे. लेकिन हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था को रद्द कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट का संतुलन

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की है. अदालत ने कहा कि धार्मिक कार्यों के दौरान किसी भी पक्ष को दूसरे की ओर से कोई रोक-टोक नहीं होनी चाहिए.

ये भी पढ़ें-पटना में बंटी यादव हत्याकांड मामले में कथित लापरवाही पर चार पुलिसकर्मी निलंबित

आगे की राह

अब तीन हफ्ते बाद इस मामले की अगली सुनवाई होगी. अदालत ने संकेत दिया है कि वह रोजाना सुनवाई करने और विवाद का समाधान निकालने के लिए तैयार है. फिलहाल दोनों पक्षों को धैर्य रखने और शांति बनाए रखने की अपील की गई है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital