विश्लेषण

World Ocean Day 2026: 95% व्यापार, दुनिया में दूसरा नंबर…जानिए भारत के लिए क्यों खास है ‘ब्लू इकोनॉमी’

World Ocean Day 2026: हर साल 8 जून का दिन दुनिया भर में विश्व महासागर दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसकी शुरुआत संयुक्त राष्ट्र ने 2008 में की थी, जिसका मकसद लोगों को महासागरों के महत्व के बारे में जागरूक करना और उनके संरक्षण की दिशा में सोच बदलना है. साल 2026 की थीम है “Reimagine: Beyond the World We Know, A New Relationship with our Ocean”, यानी हमें समुद्र को सिर्फ एक दूर की विशाल जलराशि नहीं, बल्कि अपने जीवन का अहम हिस्सा मानकर उसके साथ नए तरीके से रिश्ता बनाना होगा.

क्या है ‘ब्लू इकोनॉमी’?

ब्लू इकोनॉमी का मतलब समंदर से मिलने वाले संसाधनों का इस तरह इस्तेमाल करना जिससे हमारी अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो, लोगों को रोजगार भी मिले और सबसे बढ़कर, हमारे पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंचे.

इसमें मछली पालन, समुद्री पर्यटन (मरीन टूरिज्म), बंदरगाहों का विकास, शिपिंग, और समंदर की लहरों से बिजली बनाने जैसी कई चीजें शामिल हैं. अगर पूरी दुनिया की बात करें, तो ग्लोबल लेवल पर यह कारोबार करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर का है. वहीं, भारत की जीडीपी में फिलहाल इसका योगदान लगभग 4% है. लेकिन जानकारों का मानना है कि साल 2030 तक भारत की ब्लू इकोनॉमी अकेले 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को छू सकती है.

भारत के लिए क्यों खास है समंदर?

भारत की एक बहुत बड़ी आबादी, खासकर तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों लोग, अपनी रोजी-रोटी के लिए पूरी तरह समंदर पर निर्भर हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि मछली उत्पादन के मामले में भारत दुनिया में दूसरे नंबर पर आता है. यही नहीं, भारत का लगभग 95% व्यापार आज भी समुद्री रास्तों के जरिए ही होता है. यानी अगर समंदर न हो, तो देश का पूरा बिजनेस ही ठप हो जाए.

लेकिन इस चमक के पीछे कुछ काले बादल भी हैं. आज हमारे महासागर बढ़ते प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे, जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ने (ओवरफिशिंग) और क्लाइमेट चेंज जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं.

सरकार की क्या है तैयारी?

केंद्र सरकार ब्लू इकोनॉमी को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर मान रही है. इसके लिए जमीन पर कई बड़ी योजनाओं पर काम चल रहा है:

  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): साल 2020 में शुरू हुई इस योजना का मकसद देश में ‘नीली क्रांति’ लाना है. इसके तहत 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया जा रहा है ताकि मछली पालन के तौर-तरीकों को आधुनिक बनाया जा सके और मछुआरों की कमाई को दोगुना किया जा सके.
  • सागरमाला प्रोजेक्ट: इस योजना के जरिए देश के बंदरगाहों (Ports) को सुधारा जा रहा है ताकि माल की आवाजाही तेजी से और कम खर्च में हो सके.
  • नेशनल ब्लू इकोनॉमी पॉलिसी: 2021 में आई इस नीति का पूरा फोकस इस बात पर है कि हम समंदर का इस्तेमाल तो करें, लेकिन उसकी सुरक्षा और पर्यावरण के नियमों को ताक पर रखकर नहीं.
  • ये सभी कोशिशें न केवल हमारी अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे रही हैं, बल्कि पर्यावरण को बचाने के वैश्विक लक्ष्य (जैसे 2030 तक 30% महासागर क्षेत्र का संरक्षण) को पूरा करने में भी मदद कर रही हैं.

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-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

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