अमेरिका भारत के बीच 100 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है.
US Tariff On India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाया गया 50% टैरिफ 27 अगस्त 2025 से लागू हो चुका है, जिसका भारतीय अर्थव्यवस्था, निर्यात और रोजगार पर गहरा असर पड़ने की संभावना है. यह टैरिफ ट्रम्प ने मोदी सरकार के स्वाभिमान से जल-भुनकर लगाया है, जिसमें मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ट्रम्प को भारत-पाक सैन्य टकराव रुकवाने का क्रेडिट न देना और रूस से तेल एवं सैन्य उपकरणों की खरीद के फैसले शामिल हैं.
ट्रम्प का 50% टैरिफ लागू होने के साथ ही भारत अब सबसे ज्यादा अमेरिकी टैरिफ झेलने वाले देशों में शामिल हो गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत के निर्यात में 70% तक की कमी आ सकती है, जिससे 48 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात प्रभावित होगा.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, यह टैरिफ भारत के 66% निर्यात को प्रभावित करेगा, जिसका मूल्य 2025 में 86.5 बिलियन डॉलर था. अगले साल यह घटकर 49.6 बिलियन डॉलर रह सकता है. टेक्सटाइल, ज्वेलरी, ऑटोमोबाइल और अन्य क्षेत्रों में उत्पादन केंद्र जैसे तिरुपुर, नोएडा और सूरत पहले ही प्रभावित हो रहे हैं. क्रिसिल रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि कुछ सामानों के निर्यात में 43% तक की गिरावट हो सकती है, जिससे लाखों नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं.
हालांकि, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और पेट्रोलियम जैसे क्षेत्रों को अभी टैरिफ से छूट मिली है, जो भारत के 30% निर्यात का हिस्सा हैं. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2025-26 के लिए 6.5% जीडीपी वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद स्थिरता दर्शाता है.
फिच रेटिंग्स ने भी कहा है कि टैरिफ का जीडीपी पर असर मामूली होगा, क्योंकि अमेरिका को भारत का निर्यात कुल जीडीपी का केवल 2% है.
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भारत सरकार इस टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रही है. वाणिज्य मंत्रालय ने ब्रिटेन, जापान और दक्षिण कोरिया सहित 40 देशों में निर्यात बढ़ाने की योजना बनाई है.
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विशेषज्ञों का सुझाव है कि भारत को जवाबी टैरिफ लगाने के बजाय बातचीत और नए व्यापार समझौतों पर ध्यान देना चाहिए. ईवाई इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, टैरिफ के बावजूद भारत 2038 तक दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है.
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