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1857 Revolt Indian History: 1857 की महान क्रांति भारतीय इतिहास की वह निर्णायक घटना थी, जिसने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी. इस विद्रोह का तात्कालिक कारण ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा सैनिकों को दी गई नई एनफील्ड राइफल बनी. 1857 के शुरुआती महीनों में कंपनी ने अपने सिपाहियों को ये राइफलें सौंपीं. इन राइफलों में कारतूस लोड करने से पहले उसे मुंह से काटना पड़ता था. सैनिकों में तेजी से यह अफवाह फैल गई कि कारतूसों में गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है. हिंदू और मुस्लिम दोनों सिपाहियों के लिए यह धार्मिक भावनाओं का गंभीर उल्लंघन था.
सिपाहियों ने इन कारतूसों का इस्तेमाल करने से साफ इनकार कर दिया. इस विरोध में मंगल पांडे सबसे आगे थे. कंपनी ने उन्हें फांसी दे दी. यही घटना 1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण बनी. विरोध धीरे-धीरे मेरठ की जेल से शुरू हुआ और पूरे देश में फैल गया. सिपाही अब केवल कारतूस का विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि वे अंग्रेजी शासन को पूरी तरह खत्म करने और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को शासन सौंपने का इरादा रखते थे.
10 मई की रात को मेरठ के सिपाहियों की एक टोली घोड़ों पर सवार होकर सुबह-सुबह दिल्ली पहुंच गई. उन्होंने बहादुर शाह जफर को अपना नेता घोषित कर दिया. दिल्ली पर विद्रोहियों के कब्जे की खबर जैसे ही देशभर में फैली, बगावत के सुर और तीखे हो गए. छोटे-छोटे कस्बों और गांवों में भी विद्रोह भड़क उठा. कई मोर्चों पर ईस्ट इंडिया कंपनी की जबर्दस्त हार हुई. भारतीयों को लगने लगा कि कंपनी का शासन अब समाप्त हो जाएगा.
लेकिन कंपनी ने पलटवार किया. इंग्लैंड से गोला-बारूद मंगवाया गया. पहला और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव दिल्ली था. कंपनी की फौजों ने जुलाई से सितंबर तक दिल्ली की घेराबंदी कर रखी. जैसे ही अतिरिक्त गोला-बारूद दिल्ली के पास पहुंचा, अंग्रेजों की जीत आसान हो गई. 20 सितंबर 1857 को अंग्रेज फौजों ने दिल्ली पर फिर कब्जा कर लिया.
इस घटना के साथ क्रांति कमजोर पड़ गई. अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की आंखों के सामने उनके तीन बेटों को गोली मार दी गई. बाद में उन पर मुकदमा चलाया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई. रंगून की जेल में ही उन्होंने अंतिम सांस ली.
दिल्ली का पतन 1857 की क्रांति का निर्णायक मोड़ था. इसने न केवल मुगल साम्राज्य के अंतिम प्रतीक को समाप्त कर दिया, बल्कि अंग्रेजी शासन को और मजबूत बनाने का रास्ता भी साफ कर दिया. फिर भी, इस विद्रोह ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की नींव रखी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा दी.
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-भारत एक्सप्रेस
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