Trump Tariff On India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयातित सभी सामानों पर 50% टैरिफ लगाने की अपनी धमकी को हकीकत में बदल दिया है. यह टैरिफ आज यानी 27 अगस्त 2025 से लागू हो गया है. इससे पहले जुलाई में ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाया था, और अब अतिरिक्त 25% जोड़कर कुल टैरिफ 50% कर दिया गया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम भारत को रूसी तेल खरीदने की ‘सजा’ के रूप में देखा जा रहा है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि भारत की रूसी तेल आयात नीति अमेरिकी हितों के विपरीत है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहा है. इस फैसले से भारत-अमेरिका संबंधों में नई दरार पड़ सकती है, जो पहले से ही व्यापार और रक्षा क्षेत्र में मजबूत हो रहे थे.
₹5.4 लाख करोड़ के निर्यात पर असर
इस टैरिफ से भारत के ₹5.4 लाख करोड़ के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां ज्वेलरी, कपड़े, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाएं प्रमुख हैं. विशेषज्ञों का अनुमान है कि अमेरिका में भारतीय ज्वेलरी और कपड़ों की मांग 70% तक घट सकती है. इससे लाखों निर्यातकों को भारी नुकसान होगा, जो देश में करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं. छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई) सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि उनके पास वैकल्पिक बाजार तलाशने की क्षमता सीमित है.
साथ ही, यह टैरिफ भारत के शेयर बाजार को अस्थिर कर सकता है, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार है. विदेशी निवेशकों के अरबों डॉलर के निवेश पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट की आशंका है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे भारत की जीडीपी वृद्धि दर पर 0.5-1% का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
फिजी पीएम राबुका का मोदी को संदेश
इस बीच, फिजी के प्रधानमंत्री सितिवेनी लिगामामदा राबुका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन चुनौतियों से निपटने की हिम्मत दी है. राबुका रविवार को चार दिवसीय यात्रा पर भारत आए हैं और मंगलवार को नई दिल्ली में भारतीय विश्व मामलों की परिषद के ‘ओशन ऑफ पीस’ व्याख्यान के बाद उन्होंने यह बयान दिया.
ANI से बातचीत में राबुका ने कहा, ‘अमेरिका के टैरिफ की हालिया घोषणा के बाद मैंने पीएम मोदी से कहा था कि कोई आपसे नाराज है, मगर आप इतने विशाल हैं… संभाल लेंगे.’ उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी में ऐसी चुनौतियों का सामना करने की ताकत है. फिजी पीएम का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है. राबुका ने भारत को प्रशांत क्षेत्र में शांति का प्रतीक बताते हुए कहा कि मोदी की नेतृत्व क्षमता वैश्विक चुनौतियों से पार पाने में सक्षम है.
ट्रंप के फैसले का आपसी संबंधों पर असर
ट्रंप के इस फैसले से भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक रिश्तों को नुकसान पहुंच सकता है. दुनिया की सबसे बड़ी अमेरिकी कंपनियों में से दो-तिहाई का कारोबार भारत में है, जिसमें ऐपल, गूगल और अमेजन जैसी कंपनियां शामिल हैं. ये कंपनियां भारत को उत्पादन केंद्र के रूप में देख रही हैं, लेकिन टैरिफ से उनकी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होगी.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि यह कदम अमेरिका की खुद की रणनीति को कमजोर कर सकता है, जो चीन की फैक्ट्रियों पर निर्भरता कम करने के लिए भारत को वैकल्पिक स्रोत के रूप में बढ़ावा दे रही थी. अब भारतीय उत्पाद महंगे होने से अमेरिकी आयातक फिर चीन की ओर रुख कर सकते हैं. भारत सरकार ने अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विदेश मंत्रालय अमेरिका से बातचीत के जरिए समाधान तलाश रहा है. साथ ही, भारत अन्य बाजारों जैसे यूरोपीय संघ और एशियाई देशों में निर्यात बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर सकता है.
टैरिफ पर वैश्विक प्रतिक्रियाएं, आगे की राह
ट्रंप के टैरिफ पर वैश्विक स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं. जहां कुछ देशों ने इसे अमेरिकी संरक्षणवाद की वापसी बताया है, वहीं भारत के सहयोगी जैसे फिजी ने समर्थन जताया है. राबुका का बयान भारत की कूटनीतिक सफलता को दर्शाता है, जहां छोटे द्वीपीय राष्ट्र भी मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जता रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को रूसी तेल आयात जारी रखते हुए अमेरिका से संतुलन बनाना होगा, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा देश की प्राथमिकता है. आने वाले दिनों में विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में इस मुद्दे को उठाया जा सकता है. कुल मिलाकर, यह टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन मोदी सरकार की रणनीतियां इसे संभालने में मदद कर सकती हैं. फिजी पीएम के शब्दों में, भारत ‘विशाल’ है और चुनौतियों से पार पा लेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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