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FIIs की धमाकेदार वापसी! पिछले 9 दिनों में झोंके करीब 2 अरब डॉलर, जानिए क्या हैं इसके मायने?

Foreign Investors Return: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) एक बार फिर खरीदारी में लौट आए हैं. पिछले नौ कारोबारी सत्रों में FII ने 2 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर खरीदे हैं, जिससे बाजार में तेजी देखने को मिली है. एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार 9 फरवरी को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 2,223 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे. हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह निवेश लंबे समय तक बने रहने की गारंटी नहीं है. अगर वैश्विक व्यापार में स्थिरता बनी रही, कंपनियों के मुनाफे में सुधार हुआ और डॉलर कमजोर रहा तो विदेशी निवेश जारी रह सकता है.

घरेलू निवेशकों की भूमिका पहले से मजबूत

इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी बाजार में जोरदार खरीदारी की. पिछले नौ दिनों में DII ने करीब 8,973 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे. विशेषज्ञों के अनुसार यह दिखाता है कि अब भारतीय शेयर बाजार में घरेलू निवेशकों की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है. निफ्टी50 में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी अब विदेशी निवेशकों से ज्यादा हो चुकी है. इसका कारण म्यूचुअल फंड की SIP में लगातार आ रही रकम, छोटे निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और बीमा व पेंशन फंडों का नियमित निवेश है.

मार्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल और मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि घरेलू निवेश से बाजार को लंबे समय तक स्थिर सहारा मिलता है. इससे वैश्विक संकट के समय बाजार को कम झटका लगता है. भारतीय शेयर बाजार ज्यादा मजबूत और स्थिर बनता है.

क्यों लौट रहे हैं विदेशी निवेशक?

हाल में आई गिरावट के बाद भारतीय शेयरों के दाम अब दूसरे एशियाई बाजारों की तुलना में बेहतर स्तर पर आ गए हैं, जिससे विदेशी निवेशकों की रुचि फिर बढ़ी है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बनी स्पष्टता से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है. इस तेजी के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी में 3 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई. बीएसई मिडकैप 150 में करीब 5.66 प्रतिशत और बीएसई स्मॉलकैप 250 में लगभग 6.3 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली.

ये भी पढ़ें: कैंसर की दवाओं से पिस्ता-बादाम तक: भारत-यूएस ‘Zero Tariff’ डील से अमेरिका को क्या मिला?

भारतीय रिजर्व बैंक का पड़ा असर?

बाजार के जानकारों के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक का नरम रुख, जीडीपी में सुधार, कंपनियों की अच्छी कमाई की उम्मीद और घरेलू निवेश की स्थिरता ऐसे कारण हैं जो विदेशी निवेश को भारत की ओर आकर्षित कर सकते हैं. मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2025 तिमाही तक निफ्टी50 में घरेलू संस्थानों की हिस्सेदारी करीब 24.8 प्रतिशत हो गई, जो विदेशी निवेशकों के लगभग 24.3 प्रतिशत हिस्से से मामूली रूप से अधिक है.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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