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कैंसर की दवाओं से पिस्ता-बादाम तक: भारत-यूएस ‘Zero Tariff’ डील से अमेरिका को क्या मिला?

India-US zero tariff deal: भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक समझौते का फ्रेमवर्क जारी हो गया है. इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच कई वस्तुओं को जीरो टैरिफ (Zero Tariff) श्रेणी में रखा गया है.

India-US zero tariff deal

AI द्वारा बनाई गई तस्वीर

India-US zero tariff deal: भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक व्यापारिक समझौते का फ्रेमवर्क जारी हो गया है. इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच कई वस्तुओं को जीरो टैरिफ (Zero Tariff) श्रेणी में रखा गया है. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, अमेरिका से आयात पर शून्य टैरिफ इस बात पर निर्भर करेगा कि वह वस्तुएं भारत में उत्पादित होती हैं या नहीं.

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने क्या कहा?

पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने किसानों और डेयरी सेक्टर को संरक्षित किया है और यह डील आने वाले समय में भारत के लिए अधिक लाभकारी साबित होगी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले ही भारत के लिए टैरिफ 50% से घटाकर 18% करने की घोषणा की थी, जो पड़ोसी देशों की तुलना में काफी कम है.

इन सामानों पर होगा ‘Zero Tariff’

इस डील के तहत भारत ने कैंसर की दवाओं, पिस्ता-बादाम, सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDG), लाल ज्वार, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन ऑयल, वाइन-स्पिरिट, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उत्पादों सहित कई अमेरिकी सामानों पर टैरिफ समाप्त करने या घटाने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही, अमेरिकी मेडिकल उपकरण, जैविक और अजैविक रसायन, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स और वाइन-स्पिरिट जैसे सेक्टरों में शुल्क में छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है.

विशेष रूप से पिस्ता और बादाम जैसे कृषि उत्पादों पर लागू टैरिफ को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा, ताकि स्थानीय बाजारों को कोई नुकसान न हो. इसके अलावा, अमेरिकी ICT वस्तुओं के लिए आयात लाइसेंसिंग और भारतीय बाजार में पहुंच में देरी जैसी बाधाओं को भी दूर किया जाएगा.


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अमेरिका का फायदा

इस डील का उद्देश्य भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और मौजूदा व्यापारिक बाधाओं को दूर करना है. अगले पांच वर्षों में भारत लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान और पुर्जे, कीमती धातुएं, आईटी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोयला खरीदेगा.

इस समझौते से अमेरिका को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, वहीं भारत को नई निवेश और व्यापार संभावनाओं से फायदा होगा.

-भारत एक्सप्रेस



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