केंद्र सरकार द्वारा मंगलवार को दी गई जानकारी के अनुसार, जीएसटी सुधार (GST Reforms) रिन्यूएबल एनर्जी, वेस्ट मैनेजमेंट, बायोडिग्रेडेबल उत्पाद और ग्रीन मोबिलिटी को अधिक किफायती और सुलभ बनाकर भारत के जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. लागत में कटौती, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करने और सस्टेनेबल इंडस्ट्रीज को समर्थन प्रदान कर नए बदलाव प्रदूषण नियंत्रण समाधानों को अपनाने में तेजी लाएंगे.
सौर एवं पवन उपकरणों पर जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है. इन उपकरणों में सौर कुकर, बायोगैस प्लांट, सौर ऊर्जा आधारित उपकरण, सौर ऊर्जा जनरेटर, पवन चक्कियां, पवन संचालित विद्युत जनरेटर, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और डिवाइस, सौर लालटेन / सौर लैंप, ओशियन वेव्स एनर्जी डिवाइस और प्लांट् और फोटो वोल्टेइक सेल शामिल हैं.
केंद्र के अनुसार, जीएसटी दर में कमी से सौर पैनलों, पी.वी. सेल, पवन टर्बाइन और संबंधित उपकरणों की पूंजीगत लागत में सीधे तौर पर कमी आएगी. इस कटौती से सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की व्यवहार्यता बढ़ेगी, जिससे अंतिम उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ कम हो जाएगा.
जीएसटी दर में कटौती से पीएलआई योजनाओं के तहत भारत के सौर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को समर्थन देकर घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा, जिससे घरेलू उत्पाद आयात के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे. इससे सौर पंप अधिक किफायती हो जाएंगे, सिंचाई लागत कम होगी और किसानों को सहायता मिलेगी.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 42 गुना से भी अधिक बढ़ गई है , जो 2014 में 2.82 गीगावाट से बढ़कर 31 जुलाई, 2025 तक 119.54 गीगावाट हो गई है. भारत ने आर्थिक विकास को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन से अलग करने की प्रक्रिया को जारी रखा है. 2005 और 2020 के बीच भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी आई है.
इसी प्रकार, अपशिष्ट प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण के तहत अपशिष्ट उपचार (सीईटीपी) पर जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है. कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं पर जीएसटी की दर अब 5 प्रतिशत कर दी गई है.
सरकार के अनुसार, सीईटीपी पर करों में कटौती से उद्योगों को केंद्रीकृत अपशिष्ट उपचार विधियों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरणा मिलेगी, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषण मुक्त वातावरण बनेगा और औद्योगिक क्षेत्रों में सस्टेनेबल डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा. इससे नगर निगमों को अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्वच्छ ऊर्जा समाधान लागू करने में सहायता मिलेगी. जीएसटी कटौती से अपशिष्ट पृथक्करण, संयंत्र संचालन और रखरखाव जैसे क्षेत्रों में हरित रोजगार सृजित होंगे.
बायोडिग्रेडेबल बैग पर भी जीएसटी की दर को 5 प्रतिशत कर दिया गया है. बायोडिग्रेडेबल बैगों पर जीएसटी कम होने से वे अधिक किफायती हो जाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक से दूर जाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है और इस प्रकार प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद मिलती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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