बिजनेस

‘भारत का डिजिटल बुनियादी ढांचा सिलिकॉन वैली से कहीं आगे है’: विवेक वाधवा

भारत की डिजिटल क्रांति सिर्फ आगे नहीं बढ़ रही है – बल्कि यह नेतृत्व भा कर रहा है. राइजिंग भारत समिट 2025 में पैनल चर्चा के दौरान बोलते हुए, विओनिक्स बायोसाइंसेज के सीईओ, अकादमिक, उद्यमी और लेखक विवेक वाधवा ने कहा कि “भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सिलिकॉन वैली से कहीं आगे है.”

कैलिफ़ोर्निया में रहने वाले वाधवा ने कहा कि उन्हें विश्वसनीय इंटरनेट और किफायती मोबाइल सेवाओं तक पहुंचने में संघर्ष करना पड़ता है – ऐसी समस्याएं जो आज भारत में अकल्पनीय हैं. “मैं बेलमोंट में अपने घर पर फाइबर ऑप्टिक भी नहीं पा सकता. इस बीच, भारत में भिखारियों के पास भी भुगतान के लिए क्यूआर कोड हैं.” उन्होंने भारत में डिजिटल भुगतान, मोबाइल डेटा और कनेक्टिविटी को तेजी से अपनाने पर बात की.

वाधवा ने भारतीयों से आग्रह किया कि वे तकनीक के मामले में अपनी हीन भावना को दूर करें. उन्होंने कहा, “यहां लोग जियो की धीमी गति की शिकायत करते हैं, लेकिन मेरे लिए यह अमेरिका की तुलना में बिजली की गति से भी तेज है.” उन्होंने कहा कि भारत की सस्ती और सर्वव्यापी डिजिटल पहुँच कई विकसित देशों के लिए ईर्ष्या का विषय है.

आगे चर्चा में ड्रीम स्पोर्ट्स के सीईओ और सह-संस्थापक हर्ष जैन और एरिन कैपिटल पार्टनर्स के अध्यक्ष टी.वी. मोहनदास पई भी शामिल हुए. यहां भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के विकास और चुनौतियों के बारे में बताया गया.

‘भारत में डीप टेक के लिए प्रतिभा है’

डीप टेक स्टार्टअप बनाने में भारत की क्षमता के बारे में बोलते हुए, वाधवा ने इस धारणा को खारिज कर दिया कि भारत सिलिकॉन वैली से पीछे है. प्रतिभाओं को काम पर रखने के अपने अनुभव से उन्होंने कहा, “मुझे सिलिकॉन वैली की तुलना में भारत में बेहतर मशीन लर्निंग प्रतिभा मिली और वह भी बिना किसी अहंकार के.”

उन्होंने सिलिकॉन वैली के स्नातकों द्वारा मांगे जाने वाले अत्यधिक वेतन और भत्तों की तुलना युवा भारतीय इंजीनियरों की प्रेरणा और महत्वाकांक्षा से की. उन्होंने कहा, “वहां, स्टैनफोर्ड के स्नातक $200,000 की शुरुआती सैलरी चाहते हैं. यहां, मैंने ऐसे बच्चों को पाया जो सप्ताह में 70 घंटे काम करने को तैयार हैं, खुद को साबित करने के लिए उत्सुक हैं.”

वाधवा ने भारत की मजबूत शैक्षिक नींव और इसके विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम को एआई और डीप टेक टैलेंट की एक मजबूत पाइपलाइन बनाने का श्रेय दिया. उन्होंने याद किया कि कैसे कुछ भारतीय स्नातकों ने जिन्हें उन्होंने काम पर रखा था, वे अपने सिलिकॉन वैली समकक्षों के स्किल से मेल खाते थे और जल्दी ही कई मामलों में उनसे आगे निकल गए.

वाधवा ने बताया कि भारत के इंजीनियरिंग सिलेबस को अभी भी अपडेट की आवश्यकता है, खासकर क्लाउड कंप्यूटिंग और वास्तविक दुनिया के स्टार्टअप स्किल जैसे क्षेत्रों में. इन अंतरालों के बावजूद, उन्होंने कहा कि युवा भारतीय इंजीनियरों में सीखने की भूख और काम करने की नैतिकता बेजोड़ है. उन्होंने कहा, “भारत में जुनून, समर्पण और कड़ी मेहनत करने की इच्छा ऐसी चीजें हैं जो अब सिलिकॉन वैली के स्नातकों में नहीं हैं.”

-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

Recent Posts

India vs Brazil Football: साल्ट लेक स्टेडियम में धुरंधरों ने बिखेरा जलवा, जानिए दुनिया की नंबर-1 फुटबॉल टीम से हम मैच जीते या हारे

कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में खेले गए ऐतिहासिक मुकाबले में पांच बार की विश्व…

11 minutes ago

‘बंगाल के बिना फुटबॉल की बात अधूरी’, मनोज तिवारी ने कोलकाता में भारत-ब्राजील मुकाबले को बताया नया दौर

Manoj Tiwari: बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने भारत और ब्राजील के बीच मुकाबले को लेकर…

18 minutes ago

पीएम मोदी दिसंबर में असम सेमीकंडक्टर सुविधा का कर सकते हैं उद्घाटन- हिमंत बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कहा कि जागीरोड में सेमीकंडक्टर असेंबली…

1 hour ago

‘पिक्चर नहीं चली तो क्या, मैच चला देंगे’, भारत-ब्राजील फ्रेंडली मुकाबले में दिखा बोनी कपूर का फुटबॉल प्रेम

Boney Kapoor: बोनी कपूर ने कहा कि उनका फुटबॉल से पुराना रिश्ता रहा है. उन्होंने…

1 hour ago

Kolkata: भारत-ब्राजील में फुटबॉल का रोमांचक मुकाबला, Bharat Express के CMD उपेन्द्र राय ने की हौसला-अफ़ज़ाई

India vs Brazil Football Match: कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में 5 बार की वर्ल्ड…

1 hour ago

बदलेगी मुंबई T-1 की तस्वीर, अडाणी ग्रुप शुरू करेगा पुनर्विकास, जानिए उड़ानों पर क्या पड़ेगा असर?

Mumbai Airport Redevelopment: अडाणी एयरपोर्ट्स जनवरी 2027 से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई…

2 hours ago