सांकेतिक तस्वीर.
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि शहरीकरण और प्रीमियमीकरण के बढ़ते रुझान तथा टियर 2 और 3 बाजारों में डिजिटल पहुंच बढ़ने से उपभोक्ता परिदृश्य में बदलाव आ रहा है, जिससे निवेशक इस पर ध्यान देने को मजबूर हो रहे हैं. ग्रांट थॉर्नटन भारत की ताजा तिमाही डील ट्रैकर रिपोर्ट से पता चला है कि घरेलू उपभोक्ता और खुदरा बाजारों में डील गतिविधि कैलेंडर वर्ष 2025 की पहली तिमाही में तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, क्योंकि निवेशकों ने उन ब्रांडों का समर्थन किया, जिन्होंने परंपरा को इनोवेशन के साथ मिलाया.
इन सौदों में विलय और अधिग्रहण (एम एंड ए) और निजी इक्विटी (पीई) लेनदेन शामिल हैं. मार्च तिमाही में डील चार्ट में सबसे ऊपर दो अरब डॉलर के सौदे थे: पीई प्लेयर टेमासेक का हल्दीराम स्नैक फूड्स में 1 अरब डॉलर का निवेश, जिसके लिए कंपनी में 10% हिस्सेदारी और विल्मर इंटरनेशनल का एम एंड ए पक्ष पर अडानी विल्मर (जिसे अब अडानी समूह के बाहर निकलने के बाद AWL एग्री बिजनेस कहा जाता है) में अपनी शेयरधारिता (44% से लगभग 75% तक) बढ़ाने के लिए 1.4 अरब डॉलर का निवेश. ये मेगा डील भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत देते हैं.
ग्रांट थॉर्नटन भारत के भागीदार और कंज्युमर इंडस्ट्री के लीडर नवीन मालपानी ने कहा, “भारत का उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्र विकास के एक गतिशील चरण में प्रवेश कर रहा है, जिसमें खाद्य और पेय पदार्थ, व्यक्तिगत देखभाल और ई-कॉमर्स जैसे उच्च-संभावित क्षेत्रों में M&A और निजी इक्विटी निवेश बढ़ रहे हैं. विशेष रूप से, F&B क्षेत्र में मजबूत गति देखी जा रही है, क्योंकि उपभोक्ता बेहतर उत्पाद चाहते हैं और ब्रांड उन तक पहुँचने के लिए डिजिटल वितरण को अपना रहे हैं.”
डील वैल्यू और वॉल्यूम दोनों के मामले में जनवरी-मार्च तिमाही में 2023 और 2024 की समान अवधि की तुलना में भारी वृद्धि देखी गई, जो मूल्य में लगभग 4 अरब डॉलर और संख्या के मामले में 139 डील तक पहुंच गई. यह 2023 की पहली तिमाही में किए गए डील के मूल्य ($1.28 अरब) का तीन गुना और 2024 की पहली तिमाही में किए गए डील के मूल्य ($1.74 अरब) का दोगुना है. पिछले दो कैलेंडर वर्षों की पहली तिमाहियों में डील की संख्या 78 और 102 थी.
हालांकि 2025 की मार्च तिमाही में डील वैल्यू और वॉल्यूम अभी भी 2022 की पहली तिमाही से कम है, जब महामारी के बाद के पुनरुत्थान ने 171 लेन-देन में मूल्य के मामले में रिकॉर्ड 4.28 अरब डॉलर के सौदे किए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि मुद्रास्फीति और शहरी मंदी की चिंताओं के कारण उपभोक्ता और खुदरा क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण 2023 और 2024 के बाद 2025 की पहली तिमाही में तेजी अभी भी इस क्षेत्र के लिए अच्छी है.
ईवाई इंडिया के निवेश बैंकिंग सलाहकार, पार्टनर नितिन गुप्ता ने कहा, “बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी है, लेकिन बोली और पूछ मूल्य के बीच अंतर अधिक होने के कारण मूल्यांकन संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं.”
नितिन गुप्ता ने खाद्य और पेय पदार्थ, स्वास्थ्य सेवा, सौंदर्य और व्यक्तिगत देखभाल जैसे क्षेत्रों का हवाला दिया, जहां निवेशकों की रुचि अधिक बनी हुई है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध और इसकी अनिश्चितता भी फिलहाल डील गतिविधि को धीमा कर सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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