(प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
CBRE के अनुसार, भारतीय रियल एस्टेट ने पिछले साल 11.4 अरब अमेरिकी डॉलर का इक्विटी निवेश आकर्षित किया, जो सालाना 54 प्रतिशत की वृद्धि है. यह निवेश मुख्य रूप से डेवलपर्स और संस्थागत निवेशकों की ओर से किया गया.
रियल एस्टेट कंसल्टेंट CBRE ने शुक्रवार (10 जनवरी) को जारी एक रिपोर्ट में कहा कि इक्विटी निवेश में वृद्धि भूमि अधिग्रहण के साथ-साथ रियल एस्टेट के सभी परिसंपत्ति वर्गों में विकास में हुई है. घरेलू निवेश प्राथमिक चालक बना रहा, 2024 कैलेंडर वर्ष में कुल इक्विटी निवेश में इसकी हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत होगी.
सिंगापुर, अमेरिका और कनाडा ने 2024 में भारतीय रियल एस्टेट में कुल इक्विटी निवेश में 25 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया. डेवलपर्स ने पूंजी प्रवाह में अग्रणी भूमिका निभाई, 2024 में कुल इक्विटी निवेश का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया. इसके बाद संस्थागत खिलाड़ियों ने 36 प्रतिशत, निगमों ने 11 प्रतिशत, आरईआईटी (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स) ने 4 प्रतिशत और अन्य श्रेणियों ने लगभग 5 प्रतिशत का योगदान दिया.
सीबीआरई के चेयरमैन और सीईओ (भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व और अफ्रीका) अंशुमान मैगजीन ने कहा, ‘हमें निवेश गतिविधि में निरंतर गति देखने की उम्मीद है, खासकर निर्मित कार्यालय परिसंपत्तियों और आवासीय विकास स्थलों में. ई-कॉमर्स और त्वरित वाणिज्य पर बढ़ते फोकस से लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग क्षेत्र में मजबूत वृद्धि होगी, जिससे डेवलपर्स और निवेशकों दोनों के लिए नए अवसर पैदा होंगे.’
परिसंपत्ति वर्गों के संदर्भ में 2024 में इक्विटी निवेश मुख्य रूप से भूमि/विकास स्थलों द्वारा संचालित किया गया, जिसकी कुल हिस्सेदारी 39 प्रतिशत थी. इसके बाद कार्यालय क्षेत्र में 32 प्रतिशत, खुदरा क्षेत्र में 9 प्रतिशत, आवासीय क्षेत्र में 8 प्रतिशत, औद्योगिक और रसद (आई एंड एल) में 6 प्रतिशत, होटल में 2 प्रतिशत और अन्य क्षेत्रों में 4 प्रतिशत से अधिक निवेश हुआ.
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एसेट्ज प्रॉपर्टी ग्रुप के कार्यकारी निदेशक सुनील पारीक ने कहा कि यह सुधारों द्वारा संचालित क्षेत्र के उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है. उन्होंने कहा, ‘कोविड के बाद की लचीलापन और प्रीमियमीकरण प्रवृत्ति, जिसमें आवासीय क्षेत्र में लक्जरी और प्रीमियम संपत्तियों की वृद्धि सबसे आगे है, ने वैश्विक निवेशकों का विश्वास भी बढ़ाया है.’
पारीक ने कहा कि वाणिज्यिक, वेयरहाउसिंग, आवासीय, डेटा सेंटर और उभरते परिसंपत्ति वर्गों में निवेश का यह समग्र प्रभाव और आकर्षण भारत की स्थिति को एक गतिशील और भरोसेमंद रियल एस्टेट बाजार के रूप में मजबूत कर रहा है.
रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन फर्म बीसीडी ग्रुप के सीएमडी अंगद बेदी ने कहा कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग में बढ़ती डिस्पोजेबल आय, महामारी के बाद एक परिसंपत्ति के रूप में आवास के बढ़ते महत्व और करोड़पति संस्थापकों और कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि के कारण तेजी से वृद्धि देखी जा रही है. बेदी ने कहा, ‘ये कारक रियल एस्टेट सेगमेंट में वृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं जो दुनिया भर से निवेशकों को आकर्षित कर रहा है.’
-भारत एक्सप्रेस
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