क्राइम

POCSO Act का दुरुपयोग: 13 साल की लड़की की शिकायत पर चाचा को भेज दिया गया जेल; 3 साल बाद ऐसे खुली पोल

ग्वालियर से मनोज चौबे की रिपोर्ट


मध्य प्रदेश में ग्वालियर से एक चर्चित POCSO मामले में स्‍पेशल पॉक्सो कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया है. यह मामला 2023 का है, जहां थाटीपुर थाना क्षेत्र में 13 वर्षीय नाबालिग लड़की ने अपने चाचा और उसके दोस्त एडवोकेट के खिलाफ बलात्‍कार की शिकायत दर्ज कराई थी.

शिकायत में कहा गया था क‍ि 10 जून 2023 को लड़की के चाचा ने घर में अकेला पाकर उसके साथ दुर्व्यवहार किया. इतना ही नहीं, चाचा के दोस्त एडवोकेट संकेत साहू के खिलाफ भी ऐसी ही शिकायत दर्ज कराई गई थी. तब थाटीपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 अगस्त 2023 को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. जिसके बाद आगे चलकर जब कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश किए गए CCTV फुटेज ने अभियोजन की कहानी पर पूरी तरह से सवाल खड़े कर दिए.

CCTV फुटेज के कारण झूठी शिकायत फुर्र हुई

संवाददाता के अनुसार, CCTV फुटेज में सामने आया कि जिस समय घटना होने का दावा किया गया था, उस समय नाबालिग घर से बाहर ही नहीं निकली थी और आरोपी चाचा भी अपने कमरे से बाहर नहीं आए थे. अदालत ने बारीकी से उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन का घटनाक्रम सबूतों से मेल नहीं खा रहा है, जिसके बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया.

‘मुझे पेशेवर और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी’

कोर्ट से बरी होने के बाद एडवोकेट संकेत साहू ने कहा कि झूठे आरोपों के कारण उन्हें और उनके परिवार को मानसिक सामाजिक और पेशेवर स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ा है. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच होती तो उन्हें इतने लंबे समय तक परेशान नहीं होना पड़ता. सबसे बड़ी बात यह मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में यदि पुलिस की जांच निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर नहीं होगी तो न्याय व्यवस्था और POCSO जैसे सख्त कानूनों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है. वहीं, यह भी महत्वपूर्ण है कि हर मामले में तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस की निष्पक्ष जांच हो, ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिले और निर्दोष लोगों को गलत तरीके से अभियोजन का सामना न करना पड़े.

तत्कालीन जांच अधिकारी पर होगी कार्रवाई

इस मामले में अब स्‍पेशल POCSO कोर्ट ने मामले की विवेचना पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए तत्कालीन जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर बलराम मांझी के खिलाफ पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं. कोर्ट का यह फैसला पॉक्सो जैस सख्त कानूनों के तहत निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर दिया गया है.

यह भी पढ़िए: महिला आरोपी पर भी POCSO एक्ट के तहत मुकदमा चल सकता है या नहीं सुप्रीम कोर्ट करेगा तय, नोटिस जारी कर मांगा जवाब

Bharat Express Desk

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