सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महिला द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. महिला ने पॉक्सो अधिनियम 2012 की धारा महिला आरोपी पर लागू किए जाने को चुनौती दी है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दिया है.
यह याचिका अर्चना पाटिल नामक महिला ने दाखिल किया है. याचिकाकर्ता पर 13 वर्षीय लड़के के साथ यौन शोषण का आरोप है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दलील देते हुए कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा 3(1)(a) से 3 (1)(c) लिंग विशिष्ट है, क्योंकि इनमें आरोपी के लिए He और His जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है और ये प्रावधान महिला अभियुक्त पर लागू नहीं हो सकता है.
13 साल के लड़के की टीचर पर लगा है आरोप
मामला बेंगलुरु की 48 वर्षीय महिला अर्चना पाटिल से जुड़ा है. उनपर आरोप है कि उन्होंने अपने पड़ोस के13 वर्षीय लड़के का यौन शोषण किया, जब वह उनके घर आर्ट क्लास लेने जाता था. जिसके बाद लड़के के माता-पिता ने इसकी शिकायत बेंगलुरु पुलिस में दर्ज कराया. पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ पॉक्सो की धारा 4 और 6 के तहत चार्जशीट दाखिल किया है. यह मामला बेंगलुरु के फास्ट ट्रैक कोर्ट में लंबित है.
आरोपी महिला ने पॉक्सो एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा था कि पॉक्सो अधिनियम जेंडर- न्यूट्रल है और इसके तहत महिला आरोपी के खिलाफ भी मुकदमा चलाया जा सकता है.
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह अधिनियम सभी बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया है, चाहे वे किसी भी लिंग के हों. इसका उद्देध्य बचपन की पवित्रता की रक्षा करना है. इसलिए कानून का दायरा पुरूष और महिला दोनों अपराधियों पर समान रूप से लागू होता है. जिसके खिलाफ महिला ने 18 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. इसके बाद कोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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