चुनावी विश्लेषण

Bihar counting: कोसी क्षेत्र की 17 सीटों पर शुरुआती बढ़त में महागठबंधन लेकिन बिहार में एनडीए ने बहुमत हासिल किया

Bihar counting : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना आज सुबह 8 बजे शुरू होने के साथ ही राज्यभर का राजनीतिक माहौल बेहद उत्सुकता से भरा हुआ है. पूर्वी बिहार के सबसे अहम इलाकों में से एक कोसी क्षेत्र, जिसमें सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया जिले शामिल हैं, यहां 17 विधानसभा सीटों के रुझान चुनाव को दिलचस्प बनाते जा रहे हैं.

सुबह की शुरुआती गिनती (Bihar counting) में मिली जानकारी के अनुसार, महागठबंधन कोसी क्षेत्र की 10 सीटों पर आगे चल रहा है, जबकि एनडीए 7 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. यह स्थिति 2020 के चुनाव की तुलना में काफी अलग है, जब इस क्षेत्र की 17 में से 12 सीटें एनडीए के खाते में गई थीं. इस बार के रुझान को क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव और स्थानीय नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है.

राज्य-स्तर पर एनडीए की मजबूती,(Bihar counting)

भले ही कोसी में मुकाबला कांटे का दिख रहा हो, लेकिन राज्य-स्तर पर तस्वीर कुछ और ही है. चुनाव आयोग की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, एनडीए गठबंधन 189 सीटों के बहुमत के आंकड़े पर पहुंच चुका है. रुझानों के शुरुआती चरण में ही एनडीए की व्यापक बढ़त ने उसे चुनावी दौड़ में आगे कर दिया है. वहीं महागठबंधन 44 पर ही रह गया है जो काफी खराब प्रदर्शन माना जा रहा है.

राज्य में एनडीए की बढ़त का असर कोसी क्षेत्र पर भी देखा जा सकता है, हालांकि यहां महागठबंधन की बढ़त यह बताती है कि यह इलाका अपनी अलग राजनीतिक दिशा तय कर रहा है.

कोसी क्षेत्र की राजनीतिक अहमियत

कोसी क्षेत्र हमेशा से बिहार की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाता रहा है. इसे पूर्वी बिहार का “सोचा-समझा क्षेत्र” कहा जाता है, जहां वोटर अक्सर क्षेत्रीय और राज्य-स्तरीय मुद्दों को अलग-अलग तौलते हैं. (Bihar counting)

मधेपुरा सीट, जिसे “यादव राजनीति का गढ़” कहा जाता है, इस चुनाव में भी केंद्र में है. यहां यादव समुदाय का वोट हमेशा की तरह निर्णायक भूमिका निभा रहा है और यह सीट राज्य-स्तर के कई समीकरणों को प्रभावित करती है.

उम्मीदवारों की छवि और स्थानीय समीकरण

सुपौल, सहरसा और खगड़िया जैसी सीटों पर मौजूदा विधायकों और स्थानीय नेताओं की लोकप्रियता का प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है. विशेष रूप से सुपौल में लंबे समय से प्रभावी रहे बिजेंद्र प्रसाद यादव का असर इस बार भी नजर आ रहा है.

स्थानीय जातीय-सामाजिक समीकरण, मुक्ति संघर्ष से जुड़े मुद्दे और किसानों की समस्याएं भी इस चुनाव में मतदाताओं के रुझान को प्रभावित करती दिख रही हैं.

Bihar counting की वर्तमान स्थिति

मतगणना जारी है और अभी किसी भी सीट पर अंतिम परिणाम घोषित नहीं हुए हैं. जैसे-जैसे पोस्टल बैलेट और बाद के चरणों की ईवीएम खुल रही हैं, कई सीटों पर रुझानों में बदलाव भी हो सकता है.

महागठबंधन के लिए जहां कोसी की शुरुआती बढ़त उत्साहवर्धक है, वहीं एनडीए की राज्य-स्तरीय मजबूती यह संकेत दे रही है कि सरकार उनकी ही बनेगी ऐसे में  कोसी की 17 सीटें इस बार राज्य की सत्ता समीकरण में कोई खास भूमिका निभाने वाली नहीं हैं.

भारत एक्सप्रेस

सुशील कुमार तिवारी

Recent Posts

एशियन गेम्स में मेडल जिताने वाले कोच को महीनों से नहीं मिला वेतन

एशियन गेम्स में भारत को 3 गोल्ड मेडल जिताने वाले कंपाउंड आर्चरी टीम के कोच…

7 hours ago

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने पीएम मोदी से की मुलाकात, राज्य में शांति बहाली और विकास कार्यों पर हुई चर्चा

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह…

7 hours ago

एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने सीएम योगी से की भेंट, शिक्षा और शोध पर हुई चर्चा

एमजेपी रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने सीएम योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार…

8 hours ago

लखनऊ के कैफे संचालक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, मां बोली- ‘कान से खून बह रहा था, आंखें फूटी थीं’

लखनऊ के हजरतगंज में कैफे संचालक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला गरमा गया…

8 hours ago

उत्तरकाशी में फिर कांपी धरती, 4.2 तीव्रता के भूकंप से दहशत, घरों से बाहर निकले लोग

Uttarkashi Earthquake: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में शनिवार रात 8:07 बजे 4.2 तीव्रता का भूकंप…

8 hours ago