Election Commission SIR Process: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सोमवार शाम 4:15 बजे विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के 12 राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की शुरुआत की घोषणा की. मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने इसकी विस्तृत जानकारी साझा की.
SIR (Special Integrated Revision) मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की एक गहन प्रक्रिया है, जिसमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, मृतकों के नाम हटाना, डुप्लिकेट एंट्रीज निकालना और स्थानांतरण जैसे कार्य शामिल हैं. यह कदम 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.
2026: पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी
2027: गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश
2028: छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान. अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप में विधानसभा नहीं.
CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार में SIR (Special Integrated Revision) का सफल संचालन हुआ है, जहां पांच साल बाद विधानसभा चुनाव होने हैं. उन्होंने जोर देकर कहा, “राजनीतिक दलों ने ही इसकी मांग की थी. सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बावजूद, यह प्रक्रिया पारदर्शी रही.”
बिहार मॉडल को आधार बनाकर SIR का दूसरा चरण अब राष्ट्रीय स्तर पर शुरू होगा. बिहार में हाल ही में 65 लाख नामों की जांच के बाद अंतिम सूची 30 सितंबर को जारी हुई थी, जिसकी अपील का विकल्प अभी भी उपलब्ध है.
ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि जिन राज्यों में 2026 में विधानसभा चुनाव होंगे, वहां SIR (Special Integrated Revision) जरूर कराई जाएगी. यह चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू होगा, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया निष्पक्ष रहे. विपक्ष के ‘वोट चोरी’ आरोपों पर आयोग ने चुनौती दी कि हलफनामा दें या माफी मांगें. सुप्रीम कोर्ट ने भी बिहार SIR पर पारदर्शिता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, जिसका पालन हो रहा है. आयोग ने राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की, ताकि युवा और महिला मतदाताओं का अधिकतम पंजीकरण हो.
SIR (Special Integrated Revision) से मतदाता सूची अधिक सटीक बनेगी, जो 2026 चुनावों और उसके बाद लोकसभा चुनावों को मजबूत करेगी. हालांकि, कुछ राज्यों में स्थानीय निकाय चुनावों के कारण विलंब हो सकता है. दिल्ली में आखिरी SIR 2008 में हुई थी, जबकि उत्तराखंड में 2006 में. आयोग का लक्ष्य है कि अगले हफ्ते से प्रक्रिया शुरू हो. यह कदम लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है, जहां हर वोट की कीमत बराबर हो.
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